मुरादाबाद: जिज्ञासा अस्पताल में मरीज की मौत पर भारी हंगामा

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मुरादाबाद: गलशहीद थाना क्षेत्र स्थित जिज्ञासा अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद भारी हंगामा खड़ा हो गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉ. सीपी सिंह पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने मौत के बाद भी मरीज को जिंदा बताकर पैसे ऐंठने की कोशिश की और विरोध करने पर बदसलूकी की गई।

रात में हुई बातचीत, सुबह दे दी मौत की खबर जानकारी के अनुसार, कुंदरकी थाना क्षेत्र के रहने वाले मरीज को करीब तीन दिन पहले जिज्ञासा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर बताकर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। परिजनों का कहना है कि रात तक मरीज से बातचीत हो रही थी, लेकिन सुबह अचानक उन्हें मौत की सूचना दे दी गई। परिजनों का आरोप है कि उन्हें मौत की जानकारी समय पर नहीं दी गई और अस्पताल स्टाफ ने उनके सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

‘मौत के बाद भी वसूली और बदसलूकी’ परिजनों ने अस्पताल पर सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली गई। आरोप है कि मरीज की मौत हो जाने के बाद भी उसे कथित तौर पर जिंदा बताकर वेंटिलेटर पर रखा गया ताकि और पैसे ऐंठे जा सकें। जब परिजनों ने इसका विरोध किया, तो अस्पताल के कर्मचारियों ने उनके साथ बदसलूकी की।

एक ही दिन में 5 मौतों के दावे से मची सनसनी इस हंगामे के बीच परिजनों ने दावा किया कि जिज्ञासा अस्पताल में एक ही दिन में करीब पांच मरीजों की मौत हुई है, जिनमें से चार शवों को प्रबंधन ने उनके परिजनों को सौंप दिया है। इसी दौरान एक शव से जुड़ा वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है। इस खुलासे के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

मीडिया की एंट्री पर रोक, अस्पताल सील करने की मांग हंगामे की सूचना मिलने पर जब मीडियाकर्मी मौके पर पहुंचे, तो उन्हें अस्पताल के अंदर जाने से रोक दिया गया। परिजनों ने मीडिया के सामने अपना दर्द बयां करते हुए अस्पताल के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, डॉ. सीपी सिंह व प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अस्पताल को सील करने की पुरजोर मांग की है।

अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि क्या अस्पताल ने निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन किया था, और क्या परिजनों द्वारा लगाए गए वसूली और मौतों के आंकड़े के आरोप सही हैं।