नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद 1 नवंबर 2026, रविवार को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से माताओं का है, जो अपनी संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व में अहोई माता यानी देवी पार्वती के एक रूप की पूजा होती है।
परंपरा के अनुसार व्रती महिलाएं सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर अन्न-जल ग्रहण नहीं करतीं। शाम को दीवार पर गेरू या खड़िया से अहोई माता का चित्र बनाया जाता है, जिसमें आठ कोनों वाले तारे और बच्चों के प्रतीक चित्रित किए जाते हैं। इसके सामने दीया जलाकर अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनी जाती है और अहोई माता से संतान की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
कथा के अनुसार एक साहूकार की छोटी बहू की भूल से हुई एक घटना के बाद स्याहू माता की कृपा से उसे सात पुत्रों का सुख प्राप्त हुआ था — तभी से यह व्रत संतान की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ में जहां चांद देखकर व्रत खोला जाता है, वहीं अहोई अष्टमी में तारों के दर्शन के बाद ही पारण किया जाता है। तारों को अर्घ्य देकर व्रती महिलाएं अपना व्रत पूर्ण करती हैं। स्रोत: धार्मिक मान्यता और पंचांग परंपरा

