नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: दिवाली 8 नवंबर को है और उससे पहले घरों में सफाई का दौर शुरू हो चुका है। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी लक्ष्मी उसी घर में वास करती हैं, जहां स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा होती है। इसलिए दिवाली की सफाई केवल घर सजाने का काम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक तैयारी मानी जाती है।
परंपरा के अनुसार घर से टूटे बर्तन, बंद पड़ी घड़ियां, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, मकड़ी के जाले, सूखे पौधे और बेकार कबाड़ को हटा देना चाहिए। मान्यता है कि टूटी-फूटी चीजें नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। पुराने जूते-चप्पलों का ढेर भी मुख्य द्वार के पास नहीं रखना चाहिए।
सफाई के बाद घर को सजाने की परंपरा है — मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण, दरवाजे पर स्वस्तिक का चिह्न और आंगन में रंगोली बनाई जाती है। प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाने से सुख-समृद्धि के आगमन का संकेत माना जाता है। दीयों की रोशनी से सजा घर न केवल सुंदर दिखता है, बल्कि सकारात्मक वातावरण भी बनाता है। स्रोत: धार्मिक मान्यता और लोक परंपरा

