नई दिल्ली, 11 अक्टूबर: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के हर स्वरूप को अलग भोग अर्पित करने की परंपरा है। लोक मान्यता के अनुसार जिस देवी को उसका प्रिय भोग लगाया जाता है, उससे साधक की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है। आइए जानते हैं नौ दिनों के नौ भोगों की परंपरागत सूची।
पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाया जाता है, जिससे आरोग्य की कामना की जाती है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर या मिश्री अर्पित की जाती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध या खीर का भोग लगाने की परंपरा है। चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है।
पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित किया जाता है। छठे दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाने की मान्यता है। सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाया जाता है। आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग अर्पित किया जाता है, और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को तिल का भोग लगाने की परंपरा है।
भोग लगाने के बाद उसे प्रसाद के रूप में बांटने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कन्याओं और ब्राह्मणों को भोग का प्रसाद देने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। अष्टमी-नवमी के कन्या पूजन में भी इन्हीं परंपरागत भोगों का उपयोग किया जाता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता एवं लोक परंपरा

