नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ गया है। सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने सोमवार को सितंबर के महंगाई आंकड़े जारी किए, जिनके मुताबिक रिटेल महंगाई (CPI) बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। अगस्त में यह आंकड़ा 4.83 प्रतिशत था। खाने-पीने की चीजों की महंगाई तो और तेज है — 7.74 प्रतिशत, जो ग्रामीण इलाकों में 8.06 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्याज 108.09 प्रतिशत, अदरक 62.85 प्रतिशत और लहसुन 54.62 प्रतिशत साल-दर-साल महंगा हुआ है। राहत सिर्फ इतनी है कि आलू और टमाटर के दाम घटे हैं। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक कमजोर मानसून, पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चा तेल महंगा होना और रुपया कमजोर पड़ना इसके पीछे बड़े कारण हैं।
आपके लिए इसका मतलब: पहली बात — रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को ब्याज दरें बढ़ा दी थीं, और अब महंगाई ऊपर जाने से होम लोन और कार लोन की EMI बढ़ सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर में एक और दर वृद्धि हो सकती है। दूसरी बात — खाने का बजट अब ज्यादा महंगा पड़ेगा, खासकर गांवों में, जहां महंगाई 6.08 प्रतिशत है। तीसरी बात — सेविंग के लिए अब छोटी बचत योजनाओं और फिक्स्ड डिपॉजिट के रियल रिटर्न घटेंगे। सलाह है कि EMI वाले लोन जल्दी घटाने पर ध्यान दें और जरूरी खर्च का बजट दोबारा बनाएं।
स्रोत: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को जारी सितंबर CPI आंकड़े; Reuters पोल के अनुमान

