19 minutes 34 seconds viral Video : नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘इंस्टाग्राम कपल’ के नाम से वायरल हो रहा 19 मिनट 34 सेकंड का कथित MMS वीडियो पूरी तरह से फर्जी है। व्हाट्सएप, टेलीग्राम, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो को लेकर हरियाणा पुलिस की साइबर सेल ने स्पष्ट किया है कि यह कोई असली वीडियो नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
AI से रची गई पूरी साजिश हरियाणा पुलिस साइबर सेल के अधिकारी अमित यादव ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर बताया कि इस 19 मिनट के क्लिप में दिख रहे चेहरे, आवाज और शारीरिक गतिविधियां सभी AI द्वारा जेनरेट की गई हैं। इंटरनेट पर इसके ‘पार्ट-2’ और ‘पार्ट-3’ के नाम से जो अन्य क्लिप्स बेचे या शेयर किए जा रहे हैं, वे भी डीपफेक तकनीक का ही नतीजा हैं। यह किसी वास्तविक इंस्टाग्राम कपल का रिकॉर्डेड वीडियो नहीं है।
टेलीग्राम से शुरू हुआ वायरल का खेल पुलिस जांच के अनुसार, यह फेक वीडियो करीब 5-6 दिन पहले कुछ अज्ञात टेलीग्राम चैनलों और एडल्ट कंटेंट पेजों पर अपलोड किया गया था। वहां से आम यूजर्स ने बिना सच्चाई जाने इसे व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करना शुरू कर दिया। साइबर सेल के मुताबिक, ऐसे फेक वीडियो बनाने के पीछे साइबर अपराधियों के दो मुख्य मकसद होते हैं: पहला, पेज के व्यूज और सब्सक्राइबर्स बढ़ाकर अवैध कमाई करना; और दूसरा, किसी असली व्यक्ति के चेहरे को जोड़कर उसे ब्लैकमेल करना या उसकी छवि खराब करना।
वीडियो की सत्यता जांचने का तरीका अधिकारी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति ‘Sightengine.com’ जैसी मुफ्त वेबसाइट्स पर जाकर आसानी से चेक कर सकता है कि कोई फोटो या वीडियो असली है या AI द्वारा बनाया गया है। पुलिस ने “पहले चेक करें, फिर शेयर करें” की अपील की है।
वीडियो शेयर करने पर कड़े कानूनी प्रावधान पुलिस ने सख्त हिदायत दी है कि इस फर्जी वीडियो को न तो डाउनलोड करें, न शेयर करें और न ही अपने डिवाइस में रखें। इसे आगे भेजने वालों के खिलाफ भारतीय कानून के तहत गंभीर कार्रवाई हो सकती है:
- IT Act की धारा 67: पहली बार पकड़े जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना। दूसरी बार में 5 साल की सजा।
- IT Act की धारा 67A: पहली बार पकड़े जाने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये जुर्माना, जबकि दूसरी बार में 7 साल की कैद।
- IPC की धाराएं: इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए आईपीसी की धारा 292, 293 (अश्लीलता फैलाना) और 354C (वॉयरिज्म) भी लगाई जा सकती हैं।
साइबर सेल ने इंटरनेट यूजर्स को सतर्क करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि यह वीडियो किसी के पास आता है, तो उसे बिना देखे या शेयर किए तुरंत डिलीट कर दें।

