प्रयागराज, 15 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को अगले तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराने का आदेश दिया है।
अदालत ने साफ कहा कि ओबीसी आरक्षण पर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच और रिपोर्ट का इंतजार किए बिना चुनाव कराए जाएं। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण शामिल है, के तहत ही चुनाव होंगे। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग की जांच लंबित होने के नाम पर ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य सीट मानकर चुनाव नहीं कराए जा सकते। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण भी लागू नियमों के अनुसार बरकरार रहेगा।
राज्य सरकार ने 18 मई को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था, जो ओबीसी पिछड़ेपन की प्रकृति पर अनुभवजन्य जांच कर रहा है। इसी जांच के कारण चुनाव प्रक्रिया अटकी थी, जिसके बाद रिट याचिकाओं का यह समूह दायर हुआ था।
कोर्ट ने सरकार के 25 मई के उस आदेश को वैध ठहराया, जिसके तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। नए चुनाव होने तक वे ही पंचायतों का कामकाज देखेंगे। राज्य को आयोग को कर्मचारी, धनराशि, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थागत सहायता देने का भी निर्देश दिया गया है।
स्रोत: LiveLaw, ABP Ganga, IANS

