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तुलसी विवाह 21 नवंबर: शालिग्राम से तुलसी के विवाह की विधि, जानें सामग्री की सूची

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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह का पावन पर्व मनाया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार 2026 में देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी शुक्रवार, 20 नवंबर को है और तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को मनाया जाएगा। इसी दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और हिंदू मान्यता में विवाह जैसे शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।

तुलसी विवाह की विधि — शाम को प्रदोष काल में तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाई जाती है, हल्दी-कुमकुम लगाया जाता है और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है। पास ही शालिग्राम या भगवान विष्णु की मूर्ति को दूल्हे के रूप में स्थापित किया जाता है। गन्ने से मंडप बनाकर दोनों का विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया जाता है, जिसमें भक्त स्वयं कन्यादान करते हैं। विवाह के मंत्रों के साथ फेरे और सिंदूरदान की रस्म भी निभाई जाती है।

सामग्री की सूची — हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल-माला, लाल चुनरी, श्रृंगार का सामान (चूड़ियां, बिंदी), गन्ना, दीये, धूप, मिठाई और दक्षिणा। मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के समान पुण्य मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन तुलसी के पौधे के पास दीया जलाना विशेष शुभ माना जाता है। विवाह संपन्न होने के बाद प्रसाद बांटा जाता है और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।

स्रोत: द्रिक पंचांग, धार्मिक मान्यता