Amroha news, अमरोहा के बहुचर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड का दोषी सलीम 18 साल, 6 महीने और 6 दिन बाद सात दिन की पैरोल पर अपने गांव लौट रहा है। उसे अपनी सबसे छोटी बहन आयशा की शादी में शामिल होने के लिए पैरोल दी गई है। भारी पुलिस कस्टडी में प्रयागराज की नैनी जेल से सलीम घर के लिए रवाना हो चुका है। उसके गांव आने की खबर से जहां 14 अप्रैल 2008 के खौफनाक हत्याकांड की यादें ताजा हो गई हैं, वहीं इलाके में यह चर्चा भी तेज है कि क्या अब शबनम भी बाहर आ सकती है।
खौफ में ग्रामीण, घर में शादी की तैयारियां
सलीम के गांव लौटने से बावनखेड़ी के ग्रामीण सहमे हुए हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि 14 अप्रैल 2008 की सुबह जब घर से सात लाशें निकली थीं, तो पूरा गांव दहल गया था और वह मंजर आज भी उनकी आंखों के सामने है। वहीं, सलीम के परिवार में उसकी वापसी और बहन की शादी को लेकर खुशी है। पिता रऊफ का कहना है कि सलीम को अपनी छोटी बहन आयशा से बेहद लगाव था, जिसकी बारात 25 अक्टूबर को आ रही है। वह बहन की शादी की तैयारियों में हाथ बंटाने और डोली रुखसत करने आ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर इस परिवार में शादी की सभी रस्में घर पर ही संपन्न होंगी।
क्या सलीम के बाद शबनम भी आ सकती है बाहर?
सलीम को पैरोल मिलने के बाद लोगों की जुबान पर यह सवाल है कि क्या शबनम को भी पैरोल मिल सकती है। हालांकि, जानकारों के मुताबिक शबनम को पैरोल मिलने की संभावना कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि शबनम के माता, पिता, भाई व भतीजे समेत परिवार का कोई भी सदस्य अब जीवित नहीं है। वर्तमान में शबनम के पिता की कोठी में उसका चाचा परिवार समेत रह रहा है, लेकिन बताया जा रहा है कि चाचा का शबनम से कोई वास्ता नहीं है। शबनम का केवल एक बेटा है, जिसका पालन-पोषण बुलंदशहर का एक दंपति कर रहा है।
इनसेट: पैरोल के दौरान क्या हैं नियम और शर्तें?
सलीम को दी गई पैरोल के दौरान प्रशासन ने कुछ सख्त नियम और शर्तें लागू की हैं:
- पैरोल की अवधि के दौरान सलीम को गांव से बाहर जाने की अनुमति नहीं है।
- उसे हर दिन थाने में अपनी हाजिरी लगाना अनिवार्य है।
- पैरोल की अवधि पूरी होने पर उसे 28 अक्टूबर को वापस जेल में सरेंडर करना होगा।
- सलीम की यह पूरी पैरोल भारी पुलिस कस्टडी (निगरानी) में ही बीतेगी।

