नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: केंद्र सरकार के उन कर्मचारियों के लिए दिवाली से पहले एक ठोस राहत की खबर है जो किसी उत्पादकता-आधारित बोनस योजना के दायरे में नहीं आते। वित्त मंत्रालय के 15 अक्टूबर 2026 के कार्यालय ज्ञापन से 30 दिन के वेतन के बराबर गैर-उत्पादकता बोनस (एड-हॉक बोनस) को मंजूरी दी गई है। इस आदेश के तहत पात्र कर्मचारियों को अधिकतम 6,908 रुपये तक का बोनस मिलेगा। आदेश में साफ कहा गया है कि यह भुगतान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए है और इसका लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो तय शर्तें पूरी करते हैं।
पात्रता का दायरा काफी स्पष्ट रखा गया है। केंद्र सरकार के ग्रुप सी और नॉन-गजेटेड ग्रुप बी कर्मचारी, जो किसी उत्पादकता-आधारित बोनस (पीएलबी) योजना के अंतर्गत नहीं आते, इस बोनस के हकदार होंगे। सशस्त्र बलों और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के पात्र कर्मियों को भी इसमें शामिल किया गया है। शर्त यह है कि कर्मचारी ने संबंधित वित्त वर्ष में कम से कम छह महीने की लगातार सेवा पूरी की हो और 31 मार्च 2026 को सेवा में रहा हो। आकस्मिक श्रमिकों (कैजुअल लेबर) के लिए अलग नियम हैं — छह दिन वाले कार्यालयों में तीन साल में हर साल कम से कम 240 दिन और पांच दिन वाले कार्यालयों में कम से कम 206 दिन की सेवा जरूरी है।
रकम का गणित समझना भी जरूरी है, क्योंकि 6,908 रुपये अधिकतम सीमा है, हर किसी को यही रकम नहीं मिलेगी। गणना के लिए मासिक परिलब्धियों की सीमा 7,000 रुपये तय की गई है। सूत्र के अनुसार 7,000 को 30 से गुणा करके 30.4 से भाग देने पर 6,908 रुपये बनते हैं। पात्र आकस्मिक श्रमिकों के लिए गणना की सीमा 1,200 रुपये मासिक है, जिससे उनकी अधिकतम रकम 1,184 रुपये बनती है। यानी बोनस कर्मचारी के वास्तविक वेतन ढांचे और सेवा अवधि के हिसाब से तय होगा, न कि एक समान दर से।
भुगतान की तारीख को लेकर आदेश में कोई एक समान तिथि तय नहीं की गई है। मंत्रालयों और विभागों को अपने स्तर पर भुगतान लागू करना है, इसलिए अलग-अलग विभागों में रकम खाते में पहुंचने का समय अलग हो सकता है। गोवा सरकार ने इसी सूत्र पर अपने पात्र राज्य कर्मचारियों के लिए बोनस मंजूर किया है और वहां 6 नवंबर तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भुगतान की बात कही गई है, जिसमें सरकार से वित्तपोषित स्वायत्त निकायों के कर्मचारी भी शामिल हैं। इससे अंदाजा लगता है कि त्योहार से पहले भुगतान की प्रक्रिया तेज हो रही है।
कर्मचारियों को सलाह है कि वे अपने विभाग के आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) या लेखा शाखा से अपने बोनस की स्थिति पूछें और वेतन पर्ची में बोनस की प्रविष्टि जरूर जांचें। अगर किसी विभाग में अब तक आदेश नहीं पहुंचा है तो संबंधित प्रशासनिक शाखा से लिखित जानकारी लेना बेहतर रहेगा। सोशल मीडिया पर घूम रहे बोनस के फर्जी आदेशों पर भरोसा न करें — असली हक केवल सरकारी आदेश और विभागीय निर्देश से तय होता है।
स्रोत: वित्त मंत्रालय का कार्यालय ज्ञापन (15 अक्टूबर 2026) और राज्य सरकार के बोनस आदेशों पर आधारित खबरें

