नई दिल्ली, 31 अक्टूबर: अहोई अष्टमी का व्रत इस बार रविवार, 1 नवंबर को रखा जाएगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 2:51 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे तक रहेगी, लेकिन शाम की पूजा 1 नवंबर को ही होगी। दिल्ली के पंचांग के अनुसार शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त 5:36 बजे से 6:54 बजे तक है, और तारे शाम करीब 6 बजे दिखाई देंगे।
इस व्रत को माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखती हैं। सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को अहोई माता के चित्र के सामने पूजा की जाती है। पूजा में दीपक जलाया जाता है, रोली और चावल से तिलक किया जाता है और अहोई माता की कथा सुनी जाती है। कथा में माता की भक्ति और संतान के प्रति ममता का वर्णन मिलता है, इसलिए इसे सुनना पूजा का अहम हिस्सा माना जाता है।
अहोई अष्टमी की सबसे खास बात इसका पारण है। इस दिन चांद देर रात निकलता है, इसलिए व्रत तारे देखकर खोला जाता है। पूजा के बाद तारों को अर्घ्य दिया जाता है और फिर व्रत खोला जाता है। कई परिवारों में इसके बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है। जो माताएं निर्जला व्रत रखती हैं, उन्हें अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह लेना समझदारी होगी।
पूजा की तैयारी आज ही कर लेना बेहतर होगा, ताकि कल शाम पूजा के समय कोई सामान कम न पड़े। अपने शहर का पंचांग भी एक बार जरूर देख लें, क्योंकि पूजा और तारे दिखने का समय शहर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है।
स्रोत: द्रिक पंचांग, दिल्ली / धार्मिक मान्यता

