देहरादून। उत्तराखंड में आज बुधवार, 4 नवंबर को कांग्रेस का प्रदेशव्यापी अभियान शुरू हो गया है। पार्टी ने सरकारी जमीनों की कथित बंदरबांट और सार्वजनिक संपत्तियों के निजी इस्तेमाल के विरोध में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान चलाने का ऐलान किया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आज सुबह 10 बजे से राज्य के विभिन्न जिलों और प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
11 प्रमुख स्थानों पर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी
पार्टी ने इस अभियान के लिए 11 प्रमुख स्थानों पर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। हर स्थान पर स्थानीय विधायक या वरिष्ठ नेता प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, ताकि आंदोलन प्रदेशभर में एक साथ दिखाई दे।
कौन, कहां कर रहा है नेतृत्व
- हल्द्वानी के एचएमटी रानीबाग में विधायक सुमित हृदयेश और तिलकराज बेहड़ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।
- नैनीताल के पटवाडांगर और ज्योलीकोट क्षेत्र में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल को जिम्मेदारी दी गई है।
- भीमताल और रामगढ़ में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी और विधायक आदेश चौहान अभियान की कमान संभाल रहे हैं।
- मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल खुद प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं।
- हरिद्वार के अलकनंदा होटल परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक ममता राकेश, अनुपमा रावत और रवि बहादुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- अल्मोड़ा में विधायक मनोज तिवारी और पूर्व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, रानीखेत में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा प्रदर्शन कर रहे हैं।
- ऋषिकेश के आईडीपीएल परिसर में डॉ. हरक सिंह रावत, विकासनगर के डाकपत्थर क्षेत्र में प्रीतम सिंह और टिहरी के धनोल्टी क्षेत्र में विधायक विक्रम सिंह नेगी और लखपत बुटोला नेतृत्व कर रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप क्या है
पार्टी का आरोप है कि प्रदेश में सरकारी जमीनों के आवंटन और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल में अनियमितताएं हो रही हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि सरकारी जमीनों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
स्थानीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा
यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। जमीन और प्राकृतिक संसाधनों का मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील रहा है, क्योंकि यहां की जनता जल, जंगल और जमीन से सीधे जुड़ी हुई है। ऐसे में यह अभियान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई है। प्रशासन भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नजर बनाए हुए है।
स्रोत: कांग्रेस के अभियान ऐलान पर आधारित खबर।

