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50 बच्चों से दरिंदगी कर गंदी वीडियो बनाने वालों को कोर्ट ने दी ऐसी सजा

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उत्तर प्रदेश: बांदा बहुचर्चित पोनोग्राफी मामले में पॉक्सो कोर्ट ने 160 पृष्ठ के फैसले में आरोपी रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को सुनाई मौत की सजा और इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को पीड़ित बच्चों को 10 -10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी दिया आदेश दिया है। 31 अक्टूबर 2020 में सीबीआई ने आरोपी राम भवन के खिलाफ 50 से अधिक बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न और उनका वीडियो बनाकर विदेश में बेचने का आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। जिस मामले में शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को 160 पृष्ठ के फैसले में पॉक्सो अदालत ने राम भवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाते हुए आदेश दिया कि इन्हें मरते दम तक लटकाया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़ित बच्चों को सरकार द्वारा 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

सीबीआई को इंटरपोल से मिली थी जानकारी

30 अक्टूबर 2020 को सीबीआई ने इस प्रकरण में मुकदमा दर्ज किया और विवेचना के दौरान 16 नवंबर 2020 को सिंचाई विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर राम भवन को सीबीआई की टीम ने चित्रकूट से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में इस प्रकरण में गवाहों को धमकाने के मामले में आरोपी रामभवन की पत्नी दुर्गावती को भी चित्रकूट से 28 दिसंबर 2020 को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। तभी से दोनों आरोपी में बांदा के मण्डल कारागार में बंद थे। आरोपी रामभवन मूलरूप से बांदा जनपद के नरैनी कस्बे का रहने वाला है। इस प्रकरण में सीबीआई ने कोर्ट में 74 गवाहों को पेश किया था।

पति पत्नी की करतूत सुन खून खौल जाएगा

बांदा जिले के जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी बच्चों के साथ हैवानियत करते थे और उनके अश्लील वीडियो बनाकर डार्क वेब पर बेचते ते। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” करार दिया है। पति रामभवन सिंचाई विभाग का जेई था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। रामभवन की पोस्टिंग चित्रकूट में थी। दोनों पति पत्नी गरीब घरों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे और दोनों मिलकर नाबालिगों के साथ कुकर्म करते थे। पीड़ित बच्चों की उम्र 5 से 16 साल के बीच होती थी, कुछ की उम्र तीन साल से कम थी। बच्चों के साथ पत्नी भी संबंध बनाती थी, रामभवन भी कुकर्म करता था। फिर दोनों इसका वीडिया बनाते थे और उन अश्लील वीडियो/फोटो को डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क के जरिए विदेशों तक पहुंचाते थे।

दोनों ने किया जघन्य अपराध

रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। इनमें अप्राकृतिक यौन संबंध, गंभीर यौन उत्पीड़न, बाल पोर्नोग्राफी और आपराधिक साजिश आदि शामिल हैं।जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि आरोपियों ने यौन अपराध किए थे। ये अपराध बर्बर थे; कुछ पीड़ितों के गुप्तांगों पर चोटें आईं। कुछ को तो सालों तक अस्पतालों में रहना पड़ा। कुछ की आंखों में चोटें आई हैं, और कई पीड़ित दरिंदों द्वारा पहुंचाए गए मानसिक आघात से पीड़ित हैं। अदालत ने कहा कि कई जिलों में फैले इस अपराध के व्यापक पैमाने और दोषियों के घोर नैतिक पतन को देखते हुए यह एक ऐसा असाधारण और जघन्य अपराध है जिसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, और न्याय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक दंड अनिवार्य है।