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खाते में आए 10 करोड़, लेकिन नहीं डोला यूपी की इस महिला का ईमान, RBI पहुंचा मामला

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UP News-मैनपुरी: आज के समय में जहां लोग छोटी-छोटी रकम के लिए लालच में आ जाते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले से ईमानदारी की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है जिसकी चर्चा देशभर में हो रही है। जिले के देवगंज गांव की रहने वाली सीता देवी के बैंक खाते में अचानक लगभग 10 करोड़ (9,99,49,588) रुपये आ गए, लेकिन इतनी बड़ी रकम देखकर भी उनका ईमान नहीं डगमगाया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सच्चाई का पता नहीं चलता, वह एक रुपया भी नहीं निकालेंगी।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, सीता देवी पत्नी पारसभान बहेलिया ने भैंस खरीदने के लिए करीब दो साल पहले बैंक ऑफ इंडिया (BOI) की सुल्तानगंज शाखा से लोन लिया था। बीते 24 मार्च को जब वह अपने बेटे अरुण के साथ एटीएम पर बैलेंस चेक करने पहुंचीं, तो स्क्रीन पर 9 करोड़ 99 लाख 49 हजार 588 रुपये का बैलेंस देखकर उनके होश उड़ गए। यकीन न होने पर उन्होंने दोबारा बैलेंस चेक किया, लेकिन स्क्रीन पर फिर वही रकम नजर आई।

ईमानदारी का वीडियो हुआ वायरल, RBI ने लिया संज्ञान

नवरात्र के कारण बैंक बंद थे। ऐसे में सीता देवी ने अपने बेटे की मदद से एटीएम पर ही एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। वीडियो में उन्होंने पूरी ईमानदारी से कहा कि उन्हें यह पैसा नहीं चाहिए और जिसका भी यह पैसा है, वह इसे वापस ले ले। यह वीडियो सोशल मीडिया पर इतनी तेजी से वायरल हुआ कि मामला सीधे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) तक पहुंच गया।

जांच में सामने आई तकनीकी गड़बड़ी की सच्चाई

RBI के निर्देश के बाद बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक पुष्पेंद्र सिंह तुरंत जांच के लिए गांव पहुंचे। जब महिला के खाते की बारीकी से जांच की गई, तो पता चला कि खाते में कोई भी संदिग्ध लेन-देन नहीं हुआ है। असल में यह सारा भ्रम एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण पैदा हुआ था।

  • क्यों दिख रहे थे 10 करोड़? बैंक मैनेजर के मुताबिक, लोन अकाउंट पर लगे ‘लियन’ (Lien) की वजह से सिस्टम में यह एंट्री दिख रही थी। यह कोई असली पैसा नहीं था।
  • असली बैलेंस: वर्तमान में सीता देवी के खाते में केवल 61,512 रुपये 75 पैसे जमा हैं।

अधिकारियों का बयान

अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) रामचंद्र साहा ने स्पष्ट किया कि महिला के खाते में करोड़ों रुपये का कोई लेन-देन नहीं हुआ है। यह सिर्फ एक तकनीकी खामी थी। 21 से 29 मार्च तक की पासबुक स्टेटमेंट में भी ऐसी कोई एंट्री दर्ज नहीं है। भले ही यह एक तकनीकी चूक थी, लेकिन सीता देवी की ईमानदारी ने सभी का दिल जीत लिया है।