चमोली में 3 दिन से जारी है आग का तांडव, गोपेश्वर में धुएं के गुबार से सांस लेना हुआ मुहाल

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चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पहाड़ों पर वनाग्नि (जंगल की आग) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। चमोली जिले के जंगलों में पिछले तीन दिनों से भीषण आग धधक रही है। आग का दायरा लगातार फैल रहा है, जिसने अब आस-पास के आवासीय क्षेत्रों के पर्यावरण को भी बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

गोपेश्वर में छाई धुएं की चादर, दमघोंटू हुई हवा जंगलों की इस आग का सबसे ज्यादा और सीधा असर जिला मुख्यालय गोपेश्वर और उसके आस-पास के इलाकों में देखने को मिल रहा है। लगातार जल रहे जंगलों के कारण पूरे गोपेश्वर शहर के आसमान में धुएं का गहरा और दमघोंटू गुबार छा गया है। शहर धुंध की एक मोटी चादर में लिपट गया है। हवा में फैले इस धुएं और राख के कणों के कारण स्थानीय लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंखों में जलन और सांस फूलने की शिकायतें बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा खतरा अस्थमा के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को हो रहा है।

अमूल्य वन संपदा राख, विजिबिलिटी भी घटी

तीन दिनों से धधक रही इस आग में अब तक कई हेक्टेयर बेशकीमती वन संपदा और जड़ी-बूटियां जलकर खाक हो चुकी हैं। आग के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं और उनके अस्तित्व पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, धुएं की वजह से इलाके में विजिबिलिटी (दृश्यता) भी काफी घट गई है, जिससे यातायात में भी जोखिम बना हुआ है।

वन विभाग, फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन की टीमें आग बुझाने के प्रयासों में लगातार जुटी हुई हैं, लेकिन दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं आग पर काबू पाने में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रही हैं।