UPI New Rules, नई दिल्ली: यदि आप भी गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm) या भीम (BHIM) जैसे ऐप्स के जरिए रोजाना UPI पेमेंट करते हैं, तो 1 जून 2026 यानी आज से आपके लिए नियम बदल गए हैं। डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित, सुगम और फ्रॉड-मुक्त बनाने के लिए बैंकिंग नियामक संस्थाओं ने कुछ नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। आज से पैसे भेजने और प्राप्त करने की प्रक्रिया में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ दी गई है।
आइए जानते हैं आज से प्रभावी हुए UPI पेमेंट के 4 सबसे बड़े बदलाव:
1. नए यूपीआई यूजर्स के लिए ‘कूलिंग पीरियड’ (Cooling-Off Period) सख्त
ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए नए यूपीआई रजिस्ट्रेशन या नए डिवाइस पर ऐप सेटअप करने वाले यूजर्स के लिए ‘कूलिंग पीरियड’ के नियम को और कड़ा किया गया है। 1 जून से, पहली बार यूपीआई आईडी बनाने वाले या नए स्मार्टफोन में ऐप लॉगिन करने वाले यूजर्स पहले कुछ घंटों तक एक सीमित राशि से अधिक का ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी का सिम या फोन चोरी हुआ है, तो तुरंत बड़ा फ्रॉड न हो सके।
2. ‘रॉन्ग ट्रांसफर’ रोकने के लिए ‘प्राप्तकर्ता नाम वेरिफिकेशन’ अनिवार्य
अक्सर देखा जाता है कि जल्दबाजी में गलत यूपीआई आईडी या नंबर टाइप होने से पैसे किसी अनजान व्यक्ति के खाते में चले जाते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए अब सभी यूपीआई ऐप्स को ‘पेई नेम वेरिफिकेशन’ (Payee Name Verification) फीचर को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अब जैसे ही आप कोई यूपीआई आईडी या नंबर दर्ज करेंगे, पैसे भेजने से पहले स्क्रीन पर बैंक खाते में दर्ज वास्तविक नाम (Official Name) स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जिससे गलत ट्रांसफर की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
3. ऑटो-डेबिट (Mandate) और रिकरिंग पेमेंट्स पर नई सीमाएं
म्यूचुअल फंड SIP, ओटीटी सब्सक्रिप्शन या बिजली-पानी के बिलों के लिए किए जाने वाले ऑटो-डेबिट (Recurring Payments) के नियमों में भी सुधार किया गया है। 1 जून से एक निश्चित सीमा से अधिक के ऑटो-डेबिट मैंडेट सेट करने के लिए एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी अतिरिक्त ओटीपी या पिन वेरिफिकेशन को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है, ताकि यूजर्स की सहमति के बिना उनके खाते से पैसे न कट सकें।
4. निष्क्रिय (Inactive) यूपीआई आईडी पर बड़ी कार्रवाई
सुरक्षा कारणों से बैंकों और पेमेंट ऐप्स को निर्देश दिया गया है कि वे उन यूपीआई आईडी (UPI IDs) को चिन्हित कर निष्क्रिय करना जारी रखें, जिनसे पिछले एक साल या उससे अधिक समय से कोई लेनदेन नहीं हुआ है। अगर आपकी भी कोई पुरानी यूपीआई आईडी है जिसे आपने लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया है, तो वह आज से ब्लॉक हो सकती है। इसे दोबारा चालू करने के लिए आपको री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा।