नई दिल्ली, 19 अक्टूबर: दिवाली के पांच दिवसीय पर्व का समापन भाई दूज से होता है। इस बार भाई दूज की तिथि को लेकर पंचांगों में मतभेद है — कुछ पंचांगों में 10 नवंबर तो कुछ में 11 नवंबर बताई गई है। अपने शहर के पंचांग के अनुसार सही दिन तय करें। इस पर्व को यम द्वितीया भी कहा जाता है और इसके पीछे यम और यमी की पौराणिक कथा जुड़ी है।
पौराणिक कथा के अनुसार यम अपनी बहन यमी यानी यमुना से मिलने उनके घर गए थे। यमी ने भाई का तिलक किया, आरती उतारी और प्रेम से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यम ने बहन को वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा और भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज पर बहन के घर जाने की परंपरा चली आ रही है।
भाई दूज की विधि के अनुसार बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, अक्षत और फूल चढ़ाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद भाई को भोजन कराया जाता है। भाई बहन को उपहार और आशीर्वाद देते हैं। कई परिवारों में इस दिन यमुना नदी में स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है।
यह पर्व भाई-बहन के स्नेह का उत्सव है। रक्षाबंधन की तरह ही भाई दूज पर भी भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। चाहे भाई-बहन कितनी भी दूर क्यों न हों, इस दिन एक-दूसरे को याद करना और शुभकामनाएं देना परंपरा का हिस्सा है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता एवं पंचांग

