नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: धनतेरस का पर्व इस बार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह पांच दिवसीय दीपोत्सव का पहला दिन है। धनतेरस को धनवंतरी जयंती भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर इसी दिन प्रकट हुए थे। इस दिन बर्तन, सोना-चांदी और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है।
धनतेरस की शाम को यम दीपदान की विशेष परंपरा है। पौराणिक कथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। उनकी पत्नी ने उस रात घर के द्वार पर दीयों की पंक्ति जलाई, आभूषण बिछाए और पति को सोने नहीं दिया। जब यमराज आए तो दीयों के तेज प्रकाश से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे बिना प्राण लिए लौट गए। तभी से त्रयोदशी की शाम यम के नाम दीया जलाने की परंपरा है।
द्रिक पंचांग के अनुसार दिल्ली में धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त शाम करीब 6 बजकर 2 मिनट से 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यम दीपदान प्रदोष काल में किया जाता है। विधि: सरसों के तेल का एक बड़ा दीया लें, उसे घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाएं। दीया जलाते समय परिवार के सभी सदस्यों की लंबी उम्र और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करें।
मान्यता है कि यम दीपदान से परिवार पर अकाल मृत्यु का संकट टलता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। दीया पूरी रात जलता रहे तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। स्रोत: द्रिक पंचांग और धार्मिक मान्यता

