नई दिल्ली, 19 अक्टूबर: धनतेरस का पर्व इस बार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन धन्वंतरि पूजन और खरीदारी के साथ ही शाम को यम दीपदान की विशेष परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि धनतेरस की संध्या को घर के मुख्य द्वार के बाहर यम के नाम का दीया रखने से परिवार अकाल मृत्यु के भय से मुक्त रहता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
यम दीपदान की विधि के अनुसार सूर्यास्त के बाद आटे या मिट्टी का चौमुखा दीया लें। इसमें सरसों का तेल डालकर चारों बाती जलाएं। दीये में थोड़े काले तिल भी डाले जाते हैं। इस दीये को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें, क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है। दीया रखते समय यम से परिवार की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। कथा के अनुसार एक राजा के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु का योग था। उसकी पत्नी ने उस रात घर के द्वार पर दीये जलाए, सोने-चांदी के सिक्कों का ढेर लगाया और पूरी रात भजन-कीर्तन किया। दीयों के प्रकाश से यम के दूत घर में प्रवेश न कर सके और राजकुमार की रक्षा हो गई। तभी से धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा चली आ रही है।
यम दीपदान के बाद घर के अंदर लक्ष्मी पूजन के दीये जलाए जाते हैं। दोनों ही दीयों का अपना-अपना महत्व है — एक रक्षा का प्रतीक है, तो दूसरा समृद्धि का।
स्रोत: धार्मिक मान्यता एवं पंचांग

