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Durga Saptashati Path Vidhi: Navratri में संपूर्ण पाठ के नियम — Kavach से Kshama Yachna तक

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नई दिल्ली, 7 अक्टूबर: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ सबसे प्रभावशाली साधनाओं में गिना जाता है। मार्कंडेय पुराण का अंग यह ग्रंथ 700 श्लोकों और 13 अध्यायों में देवी के महात्म्य का वर्णन करता है। लेकिन इसका पाठ विधि-विधान से करना आवश्यक माना जाता है, तभी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

पाठ का सही क्रम इस प्रकार है — सबसे पहले संकल्प लेकर देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ किया जाता है। इसके बाद 13 अध्यायों का क्रमवार पाठ होता है और अंत में सिद्ध कुंजिका स्तोत्र तथा क्षमा याचना की जाती है। कई साधक नवरात्रि के नौ दिनों में प्रतिदिन एक-एक या डेढ़-डेढ़ अध्याय करके नवाह्न पारायण भी करते हैं।

पाठ के नियमों में ब्रह्ममुहूर्त या प्रातःकाल स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करना, कुश या ऊनी आसन पर बैठना और अखंड दीया जलाना शामिल है। पाठ के दौरान मौन रहना चाहिए और बीच में उठना वर्जित माना जाता है। पाठ से पहले हाथ-पैर धोकर आचमन करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया गया सप्तशती पाठ सभी कष्टों से मुक्ति दिलाता है। स्रोत: मार्कंडेय पुराण परंपरा और धार्मिक मान्यता