नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: गोवर्धन पूजा इस बार 9 नवंबर को मनाई जाएगी। कुछ क्षेत्रों में यह पर्व 10 नवंबर को भी मनाया जाता है, इसलिए अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार तिथि तय करें। गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट का विशेष महत्व है। ‘अन्नकूट’ का अर्थ है — अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं, जिसे ‘छप्पन भोग’ कहा जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से गोकुलवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठा लिया था। तभी से गोवर्धन पूजा और अन्नकूट की परंपरा चली आ रही है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर उसकी पूजा की जाती है और उसके सामने अन्नकूट सजाया जाता है — यानी तरह-तरह के पकवानों को पर्वत के आकार में रखा जाता है।
अन्नकूट में दाल, चावल, सब्जियां, पूड़ी, मिठाइयां और फल शामिल किए जाते हैं। पूजा के बाद यही प्रसाद सभी भक्तों में बांटा जाता है। मान्यता है कि अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण करने से अन्न की कभी कमी नहीं होती। इस दिन गौ पूजा का भी विशेष महत्व है — गायों को सजाकर उनका पूजन किया जाता है और हरा चारा खिलाया जाता है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता / पंचांग

