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करवा चौथ 2026: सरगी से लेकर चांद देखने तक, जानें पूरी पूजा विधि

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नई दिल्ली, 28 अक्टूबर: करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे कठिन और सबसे आस्था भरा माना जाता है, क्योंकि इसमें सूर्योदय से लेकर चांद निकलने तक निर्जला उपवास रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

व्रत की शुरुआत सरगी से होती है। सरगी सास की ओर से बहू को दी जाती है और इसे सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में ग्रहण किया जाता है। सरगी में आमतौर पर मिठाई, फल, मेवे और सुहाग की चीजें होती हैं। सरगी के बाद दिनभर न तो अन्न ग्रहण किया जाता है और न ही जल पिया जाता है।

शाम को महिलाएं सोलह शृंगार करके पूजा की तैयारी करती हैं। पूजा में करवा, छलनी, दीपक, रोली, चंदन, फूल, मिठाई और सुहाग का सामान रखा जाता है। महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं। कथा के बाद चांद निकलने की प्रतीक्षा की जाती है। दिल्ली में चांद निकलने का समय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है, हालांकि शहर के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।

चांद निकलने पर छलनी से पहले चांद और फिर पति का चेहरा देखा जाता है। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोला जाता है और फिर भोजन ग्रहण किया जाता है। बुजुर्गों के अनुसार व्रत के दौरान मन में धैर्य और श्रद्धा बनाए रखना ही इस पर्व की असली भावना है।

स्रोत: पंचांग व धार्मिक मान्यता