नई दिल्ली, 24 अक्टूबर: करवा चौथ का व्रत इस बार 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जल व्रत रखती हैं और शाम को करवा माता की कथा सुनकर चांद के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार इस दिन चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात करीब 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होकर रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी, इसीलिए व्रत 29 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
व्रत की शुरुआत सरगी से होती है। सरगी सूर्योदय से पहले सास द्वारा बहू को दिया जाने वाला भोजन है, जिसे खाकर महिलाएं दिनभर निर्जल रहती हैं। सुबह स्नान के बाद व्रती महिलाएं करवा चौथ की व्रत कथा का संकल्प लेती हैं। शाम को समूह में बैठकर करवा माता, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। पूजा में मिट्टी का करवा, छलनी, दीया और मिठाई का विशेष महत्व है।
द्रिक पंचांग के अनुसार 29 अक्टूबर को दिल्ली में चंद्रोदय रात करीब 8 बजकर 17 मिनट पर होगा। चांद दिखने के बाद महिलाएं छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखती हैं, चांद को अर्घ्य देती हैं और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। ध्यान रहे कि चांद निकलने का समय शहर के हिसाब से कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग जरूर देख लें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बंधन को मजबूत करता है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है। व्रत के दिन क्रोध से बचने, दिन में सोने से परहेज और शाम की पूजा में पूरी श्रद्धा से कथा सुनने की परंपरा है। स्रोत: द्रिक पंचांग और धार्मिक मान्यता

