नई दिल्ली, 19 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि की महानवमी आज मनाई जा रही है। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले भक्तों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि व्रत का पारण कब और कैसे किया जाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि व्रत का पारण दशमी तिथि के दिन किया जाता है, यानी इस बार दशहरे के दिन 20 अक्टूबर को। कुछ परिवारों में नवमी के दिन कन्या पूजन के बाद ही पारण करने की परंपरा भी है, इसलिए अपने कुल-परिवार की रीति का पालन करना उचित माना गया है।
पारण की विधि के अनुसार दशहरे की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें। सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद कन्या पूजन करें — नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराकर दक्षिणा दें। कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। मान्यता है कि कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
पारण में सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। व्रत खोलते समय पहले फल या हल्का भोजन लें, फिर पूरा भोजन करें। तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और मांस-मदिरा से इस दिन भी परहेज रखने की सलाह धार्मिक परंपराओं में दी गई है। हवन की भस्म को माथे पर लगाने और घर में छिड़कने की परंपरा भी कई घरों में निभाई जाती है।
व्रत का पारण श्रद्धा और संयम के साथ करना चाहिए। नौ दिनों के उपवास के बाद जल्दबाजी में भारी भोजन करने से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है, इसलिए धीरे-धीरे सामान्य आहार पर लौटें। पारण के बाद मां दुर्गा की आरती अवश्य करें और प्रसाद सभी में वितरित करें।
स्रोत: धार्मिक मान्यता एवं पंचांग

