नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: नवरात्रि में ‘माता रानी के भजन’ आज सबसे ज्यादा सर्च किए जा रहे विषयों में है। भजन-कीर्तन के साथ शास्त्रीय परंपरा में नौ दिनों तक देवी के विभिन्न स्तोत्रों के पाठ का भी विधान है। मान्यता है कि हर दिन की देवी के अनुरूप स्तोत्र पढ़ने से साधना पूर्ण होती है।
प्रतिपदा से तृतीया: पहले तीन दिन दुर्गा चालीसा और देवी कवच का पाठ करें — यह रक्षा कवच माना गया है। चतुर्थी से षष्ठी तक अर्गला स्तोत्र का पाठ शुभ माना गया है, जिससे बाधाएं दूर होती हैं।
सप्तमी-अष्टमी: इन दो दिनों में कीलक स्तोत्र और सप्तशती के मध्यम चरित्र का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। अष्टमी की रात देवी अपराजिता स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा कई घरों में है।
नवमी: नवमी के दिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और देवी अपराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ करके नौ दिनों की साधना का समापन करें।
नियम: पाठ हमेशा स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्रों में, एक ही समय और एक ही स्थान पर बैठकर करें। पाठ के दौरान दीप जलता रहे और समापन पर क्षमा याचना अवश्य करें। मान्यता है कि नियमपूर्वक स्तोत्र पाठ से मनोकामना पूर्ण होती है।
जो लोग संस्कृत पाठ नहीं कर सकते, वे हिंदी अर्थ सहित दुर्गा चालीसा का पाठ करें — भाव और श्रद्धा ही साधना का मूल मानी गई है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और शास्त्रीय परंपरा

