Uttarakhand Government Advertisement

Navratri Day 3: Maa Chandraghanta Puja Vidhi — Bhog, Mantra aur Shubh Rang

Uttarakhand Government Advertisement
ताजा खबरों का अपडेट लेने के लिये ग्रुप को ज्वाइन करें Join Now

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन, यानी 13 अक्टूबर मंगलवार को मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा का स्वरूप एक ओर सौम्य और दूसरी ओर असुरों के लिए अत्यंत भयंकर है।

मान्यता है कि मां चंद्रघंटा बाघ की सवारी करती हैं और उनकी दस भुजाओं में खड्ग, त्रिशूल, धनुष-बाण सहित विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर के आतंक से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए मां ने यही रौद्र रूप धारण किया था। इसलिए इस दिन की पूजा में शक्ति, साहस और निर्भयता की विशेष कामना की जाती है।

पूजा विधि: प्रातः स्नान के बाद लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। मां की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं और घंटे या शंख की ध्वनि करें — मान्यता है कि घंटे की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। मां को लाल फूल, अक्षत, रोली और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें।

भोग: मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग प्रिय माना गया है, विशेषकर खीर चढ़ाने की परंपरा है। पूजा के बाद खीर का प्रसाद परिवार और पड़ोस में बांटें। इस दिन का शुभ रंग केसरिया या सुनहरा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तीसरे दिन व्रत-पूजा करने वालों को क्रोध पर नियंत्रण और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।

स्रोत: धार्मिक मान्यता और पंचांग परंपरा