नई दिल्ली, 23 अक्टूबर: शरद पूर्णिमा इस बार 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में यह साल की सबसे खास पूर्णिमा मानी जाती है, क्योंकि मान्यता है कि इस एक रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत का वास होता है। इसीलिए इस रात चांदनी में खीर रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
द्रिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। दिल्ली में इस दिन चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होगा, जबकि कोजागरी पूजा का निशिता काल रात 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यही समय लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे शुभ माना गया है।
खीर रखने की विधि: गाय के दूध, चावल और मिश्री से खीर बनाएं। शाम को पूजा-पाठ के बाद रात करीब 9 से 10 बजे के बीच खीर को चांदी या मिट्टी के बर्तन में रखकर खुले आसमान के नीचे चांदनी में रख दें। इसे आधी रात तक या पूरी रात चांदनी में रहने दें। अगले दिन सुबह स्नान के बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और परिवार में बांटें। मान्यता है कि चांदनी में रखी खीर में चंद्रमा की शीतल और आरोग्यदायी ऊर्जा समा जाती है।
ब्रज में इस रात को रास पूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने इसी रात गोपियों के साथ महा रास रचाया था। बंगाल, ओडिशा और असम में कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है, जबकि गुजरात में इसे शरद पूनम कहते हैं। नवविवाहित महिलाएं सालभर के पूर्णिमा व्रत की शुरुआत भी इसी दिन से करती हैं।
स्रोत: द्रिक पंचांग व धार्मिक मान्यता

