नई दिल्ली, 25 अक्टूबर: आज शरद पूर्णिमा है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और मान्यता है कि रात को चंद्रमा की किरणों से अमृत बरसता है। बहुत से लोग इस दिन व्रत रखते हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। व्रत के दौरान फलाहार का विशेष महत्व है, इसलिए क्या खाना है और क्या नहीं, यह जानना जरूरी है।
शरद पूर्णिमा के व्रत में फल, दूध, दही, मखाना और साबूदाने की खिचड़ी जैसे हल्के सात्विक आहार लिए जाते हैं। दिन में एक बार फलाहार करना और रात को चंद्रमा के दर्शन के बाद खीर का भोग लगाना परंपरा का हिस्सा है। खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की मान्यता इसी दिन से जुड़ी है।
व्रत के दौरान अन्न, नमक और तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है। लहसुन-प्याज, मांसाहार और नशीली चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत रखने वाले दिनभर स्वच्छता और संयम का पालन करें और शाम को स्नान करके चंद्रमा की पूजा करें।
रात को चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें, चंद्र देव का ध्यान करें और फिर फलाहार ग्रहण करें। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को व्रत में अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर फलाहार में ढील देनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और संयम ही इस व्रत का मूल है।
स्रोत: धार्मिक मान्यता और पंचांग परंपरा

