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सरकारी कंपनियों के अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ा, 1 अक्टूबर से मिलेगा लाभ

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नई दिल्ली, 28 अक्टूबर: केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) में काम करने वाले अधिकारियों और गैर-संघीय पर्यवेक्षकों के लिए महंगाई भत्ते की नई दरें तय कर दी गई हैं। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले लोक उद्यम विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को इस बारे में आधिकारिक ज्ञापन जारी किया है, और नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगी। इसका मतलब यह है कि अक्टूबर महीने के वेतन से ही संशोधित महंगाई भत्ते का लाभ मिलने की व्यवस्था की गई है।

आदेश के अनुसार अलग-अलग वेतनमानों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। 2017 के वेतनमान के आधार पर काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की नई दर 59.1 प्रतिशत निर्धारित की गई है। यह नवीनतम वेतनमान है, इसलिए इससे जुड़े कर्मचारियों की संख्या भी सबसे अधिक मानी जा रही है। 2007 के वेतनमान के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए नई दर 249.2 प्रतिशत होगी, जबकि 1997 के वेतनमान की श्रेणी के लिए यह दर बढ़ाकर 489.5 प्रतिशत कर दी गई है।

सबसे पुराने वेतनमान यानी 1987 के वेतनमान के लिए व्यवस्था कुछ अलग रखी गई है। इस श्रेणी में औसत अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 10069 के आधार पर बोर्ड स्तर के पदों, उससे नीचे के पदों और गैर-संघीय पर्यवेक्षकों के लिए देय महंगाई भत्ता 18,728 रुपये तय किया गया है। पुराने वेतनमानों में प्रतिशत के बजाय तय राशि का प्रावधान इसलिए किया जाता है, क्योंकि उन वेतन संरचनाओं में महंगाई भत्ते की गणना का आधार अलग होता है।

यह संशोधन औद्योगिक महंगाई भत्ते (IDA) की व्यवस्था के तहत किया गया है, जो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के अधिकारियों और गैर-संघीय पर्यवेक्षकों पर लागू होती है। सामान्य केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA) और सार्वजनिक उद्यमों के औद्योगिक महंगाई भत्ते (IDA) की गणना का तरीका अलग-अलग होता है, इसलिए दोनों की दरों में भी अंतर दिखता है। यही वजह है कि पुराने वेतनमानों में प्रतिशत की दरें सैकड़ों में नजर आती हैं, जबकि 2017 के वेतनमान में दर 59.1 प्रतिशत है।

लोक उद्यम विभाग ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि भारत सरकार के सभी प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाले सभी केंद्रीय सार्वजनिक उद्यमों को इस आदेश की जानकारी दें और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह आदेश लोक उद्यम विभाग के सचिव की स्वीकृति से जारी किया गया है, इसलिए इसे औपचारिक और लागू करने योग्य माना जा रहा है।

कर्मचारियों के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि उन्हें अपने वेतनमान के अनुसार नई दर की पुष्टि अपने कार्यालय से कर लेनी चाहिए। 2017 के वेतनमान वाले कर्मचारी 59.1 प्रतिशत की दर से अपनी गणना कर सकते हैं, जबकि पुराने वेतनमान वाले कर्मचारियों को अपने वेतनमान के अनुसार तय दर या राशि देखनी होगी। अगर अक्टूबर के वेतन में संशोधित दर नहीं दिखे, तो कर्मचारी अपने मानव संसाधन या वित्त विभाग से ज्ञापन की प्रति के साथ संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत: लोक उद्यम विभाग, वित्त मंत्रालय का 27 अक्टूबर 2026 का कार्यालय ज्ञापन