नई दिल्ली, 27 अक्टूबर: दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बोनस की सबसे बड़ी खबर यही है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 30 दिन का नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड यानी एड-हॉक बोनस मंजूर किया जा चुका है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को ज्ञापन जारी करके राष्ट्रपति की मंजूरी की जानकारी दी थी। इसके तहत पात्र कर्मचारी को अधिकतम 6,908 रुपये तक का बोनस मिलेगा। खबरों के मुताबिक, अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में दिवाली से पहले यह रकम खातों में आने की उम्मीद है, हालांकि भुगतान की अंतिम तारीख संबंधित विभाग के आदेश से ही तय होगी।
बोनस की रकम कैसे तय होती है, यह समझना जरूरी है, क्योंकि हर कर्मचारी को एक बराबर पैसा नहीं मिलेगा। गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा 7,000 रुपये तय की गई है। यानी किसी कर्मचारी का वास्तविक औसत मासिक वेतन इससे ज्यादा होने पर भी गणना इसी सीमा के हिसाब से होगी। अगर किसी का औसत वेतन 7,000 रुपये से कम है, तो बोनस भी उसी अनुपात में कम होगा। यही वजह है कि अधिकतम आंकड़ा 6,908 रुपये बताया गया है, लेकिन व्यक्तिगत रकम सेवा और वेतन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
पात्रता के नियम भी साफ हैं। छह महीने से अधिक लेकिन एक साल से कम सेवा वाले कर्मचारियों को उनकी पात्र सेवा अवधि के अनुपात में बोनस मिल सकता है। जिन कर्मचारियों ने छह महीने की न्यूनतम सेवा पूरी नहीं की है, वे इसके पात्र नहीं होंगे। कैजुअल कर्मचारियों के लिए काम के दिनों की शर्त भी लागू होगी। छह दिन काम वाले कार्यालयों में साल भर में कम से कम 240 दिन और पांच दिन काम वाले कार्यालयों में कम से कम 206 दिन काम करना जरूरी होगा।
कुछ श्रेणियां इस बोनस के दायरे से बाहर रखी गई हैं। ग्रुप ए और ग्रुप बी के राजपत्रित अधिकारियों को यह एड-हॉक बोनस नहीं मिलेगा। इसके अलावा रेलवे और डाक विभाग जैसे क्षेत्रों में पहले से प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस पाने वाले कर्मचारी भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे, क्योंकि उनके लिए अलग बोनस व्यवस्था है। पार्ट-टाइम कर्मचारियों को भी यह लाभ नहीं मिलेगा। राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य संस्थानों में काम करने वालों के लिए बोनस का फैसला उनके अपने नियमों के आधार पर होगा।
भुगतान की प्रक्रिया के बारे में भी जानना जरूरी है। बोनस पर होने वाला खर्च वित्त वर्ष 2026-27 में संबंधित मंत्रालयों और विभागों के मंजूर बजट प्रावधान से किया जाएगा। भुगतान की रकम नियमानुसार राउंड फिगर में की जाएगी। कर्मचारी को सलाह है कि वह अपनी सैलरी स्लिप और विभागीय आदेश पर नजर रखे। अगर बोनस खाते में न आए, तो पहले अपने आहरण एवं संवितरण अधिकारी या वेतन एवं लेखा कार्यालय से संपर्क करें, क्योंकि भुगतान विभागवार प्रक्रिया से होता है।
कर्मचारियों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि दिवाली के खर्च, बच्चों की फीस, घर की जरूरतों या पुराने उधार के लिए यह रकम राहत दे सकती है। लेकिन सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर तारीख को अंतिम सच न मानें। जब तक विभाग का लिखित आदेश और बैंक क्रेडिट न दिखे, तब तक किसी भी दावे पर भरोसा न करें।
स्रोत: वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग का 15 अक्टूबर 2026 का ज्ञापन और समाचार रिपोर्ट (24 अक्टूबर 2026)

