नई दिल्ली, 28 अक्टूबर: रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना का पुराना फार्मूला अब सवालों के घेरे में है। उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ (UMRKS) ने मंडल रेल प्रबंधक, आगरा के माध्यम से प्रधानमंत्री और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर बोनस गणना की सीमा बदलने और 30 प्रतिशत अंतरिम राहत देने की मांग उठाई है। संघ के कार्यकर्ताओं ने आगरा छावनी स्थित लोको पायलट एवं ट्रेन मैनेजर लॉबी प्रांगण में बैठक और प्रदर्शन भी किया।
संघ की पहली और सबसे बड़ी मांग बोनस की गणना से जुड़ी है। रेलवे बोर्ड के 14 अक्टूबर 2026 के परिपत्र (RBE संख्या 84/2026) के तहत उत्पादकता संबद्ध बोनस (PLB) की गणना के लिए 7,000 रुपये प्रतिमाह की पुरानी वेतन-सीमा तय की गई है। संघ ने इस सीमा पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि सातवें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये प्रतिमाह है, इसलिए बोनस की गणना के लिए भी कम से कम 18,000 रुपये की सीमा तय की जानी चाहिए।
संघ का तर्क वैधानिक आधार पर टिका है। उसका कहना है कि नियमों के अनुसार बोनस की गणना न्यूनतम मजदूरी या निर्धारित राशि, जो भी अधिक हो, उसके आधार पर होनी चाहिए। जब न्यूनतम मूल वेतन ही 18,000 रुपये है, तो 7,000 रुपये की पुरानी सीमा पर गणना करना कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं करता। संघ ने यह भी मांग की है कि संशोधित गणना के बाद कर्मचारियों को बकाया अंतर राशि का भुगतान एकसमान रूप से किया जाए, ताकि किसी भी कर्मचारी को कम राशि न मिले।
दूसरी मांग आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से जुड़ी है। संघ ने कहा है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत में लगातार वृद्धि से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जबकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में विलंब हो रहा है। इस विलंब को देखते हुए संघ ने 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानते हुए वर्तमान मूल वेतन और मूल पेंशन पर 30 प्रतिशत अंतरिम राहत देने की मांग की है, जो संशोधित वेतन संरचना लागू होने तक जारी रहनी चाहिए।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा है कि कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा करने वाले रेलवे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन तथा बोनस से जुड़े मामलों पर सरकार को समयबद्ध और न्यायसंगत निर्णय लेना चाहिए। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष हरि बल्लभ दीक्षित, जोनल संयुक्त मंत्री बंशी बदन झा और मंडल मंत्री यू.एस. भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। संघ ने साफ कहा है कि वह कर्मचारियों के वैधानिक हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
फिलहाल यह मांग ज्ञापन के स्तर पर है और इस पर कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए कर्मचारियों को किसी भी दावे से पहले रेलवे बोर्ड के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना चाहिए। लेकिन संघ की यह पहल बोनस गणना के पुराने फार्मूले पर बहस को फिर से तेज कर गई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों की नजर बनी रहेगी।
स्रोत: उत्तर मध्य रेलवे कर्मचारी संघ का ज्ञापन और 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट

