नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.20 के स्तर पर कारोबार कर रहा है — सोमवार को शुरुआती कारोबार में इसमें 5 पैसे की मज़बूती आई, लेकिन यह अब भी ऐतिहासिक निचले स्तरों के करीब है। अमेरिका के फेडरल रिज़र्व ने तीन साल से ज़्यादा समय बाद ब्याज दरों में 25 basis points की बढ़ोतरी की है, और 18 में से 16 नीति-निर्माता साल के अंत तक एक और बढ़ोतरी की उम्मीद जता रहे हैं। इससे डॉलर मज़बूत हो रहा है और रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
कमज़ोर रुपये का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है। कच्चे तेल का आयात महंगा होता है — MCX पर क्रूड 9,006 रुपये (+272) पर पहुंच गया है। सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, विदेश में पढ़ाई और घूमना महंगा होता है, और महंगाई पर भी दबाव पड़ता है। विदेशी निवेशक भी भारतीय शेयर बेच रहे हैं — पिछले सत्र में FIIs ने 2,032.61 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटती है, तो रुपये को राहत मिल सकती है।

