अंबाला, 5 अक्टूबर: दिल्ली-अंबाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों द्वारा लगाया गया 21 घंटे लंबा जाम मांगें मान लिए जाने के बाद हटा लिया गया है। प्रदर्शनकारी किसानों को आशंका थी कि बारिश और नमी से मंडियों में पड़ा धान ख़राब हो जाएगा, और उनके पास भंडारण की जगह नहीं है — इसलिए उन्होंने राज्य सरकार से ख़रीद की तारीख़ आगे बढ़ाने की मांग की थी।
किसानों का कहना था कि अंबाला, कैथल और अन्य ज़िलों की अनाज मंडियों में सैकड़ों क्विंटल अनाज “मॉइस्चर कंटेंट” बढ़ने के कारण बर्बाद हो गया। मॉइस्चर कंटेंट धान की ख़रीद से पहले उसकी गुणवत्ता मापने का एक पैमाना है। अधिकारियों के साथ बातचीत में मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया, जिसके बाद किसानों ने नाकेबंदी हटा ली।
सरकारी ख़रीद आधिकारिक रूप से 1 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन कई किसानों ने फसल जल्दी बोई थी या जल्दी पकने वाली किस्मों का इस्तेमाल किया था, जिससे उनकी उपज ख़रीद शुरू होने से पहले ही मंडियों में पहुंच गई थी। प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि नमी प्रभावित धान के निपटारे और भंडारण की व्यवस्था पर गंभीरता से काम किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में ख़रीद कैलेंडर को फसल चक्र के हिसाब से लचीला बनाना समय की मांग है।

