नई दिल्ली, 10 अक्टूबर: अभिनेता नाना पाटेकर के 8 अक्टूबर को गोवा स्थित निवास पर कार्डियक अरेस्ट से निधन (उम्र 75 वर्ष) के बाद पणजी पुलिस ने BNSS की धारा 194 के तहत UD (Unnatural Death) केस दर्ज किया है, जिसकी ANI ने 9 अक्टूबर को पुष्टि की। लेकिन UD केस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि मौत में कोई गड़बड़ी हुई है — यह पुलिस की एक रूटीन कानूनी प्रक्रिया है।
UD केस क्या होता है? जब कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है, हादसे में मारा जाता है, या ऐसी परिस्थितियों में मौत होती है जिनमें अपराध की आशंका हो सकती है, तो BNSS की धारा 194 (पुरानी CrPC की धारा 174 का नया रूप) के तहत थाने के प्रभारी अधिकारी को घटनास्थल पर जाकर जांच करनी होती है और मौत के स्पष्ट कारणों की रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इसे “इनक्वेस्ट” कहते हैं। अचानक या अस्वाभाविक मौत के हर मामले में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि रिकॉर्ड पर मौत का कारण दर्ज हो सके।
नाना पाटेकर के मामले में मणिपाल हॉस्पिटल बम्बोलिम में 45 मिनट तक CPR के बाद उन्हें सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित किया गया था। 8 अक्टूबर की रात पुणे के डोंजे फार्महाउस में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ, जिसकी घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने नाम फाउंडेशन का काम जारी रखने की बात कही है।
संक्षेप में: UD केस दर्ज होना किसी आरोप या संदेह का प्रमाण नहीं, बल्कि कानून के तहत मौत की औपचारिक जांच की शुरुआत है।
स्रोत: ANI (Filmfare के हवाले से, 9 अक्टूबर 2026)

