हरिद्वार, 25 अक्टूबर: हर की पौड़ी पर गंगा का जलस्तर घटा देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यह कोई सूखा या संकट नहीं, बल्कि हर साल होने वाली गंगा नहर की वार्षिक बंदी है, जो 20 अक्टूबर की आधी रात से शुरू होकर 8 नवंबर तक चलेगी। इस दौरान नहर की सफाई, सिल्ट हटाने और घाटों की मरम्मत का काम किया जा रहा है, ताकि आगामी कुंभ मेले से पहले सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएं।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग इस बंदी का संचालन कर रहा है। ऊपरी गंगा नहर हरिद्वार से कानपुर तक करीब 560 किलोमीटर लंबी है और हर साल दीपावली से पहले इसे बंद करके गाद साफ की जाती है। अधिकारियों के अनुसार ब्रह्मकुंड जैसे प्रमुख स्थानों पर न्यूनतम जलापूर्ति जारी रखी गई है, ताकि धार्मिक अनुष्ठान न रुकें। सुबह और शाम की गंगा आरती के समय भी पानी छोड़े जाने की व्यवस्था की बात कही गई है।
फिलहाल श्रद्धालु घाटों पर छोटे बर्तनों से स्नान कर रहे हैं। मुंडन जैसे संस्कार भी सीमित जल में संपन्न हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर सूखे घाट की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई श्रद्धालु चिंतित हुए, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बंदी खत्म होते ही सामान्य जल प्रवाह बहाल हो जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और यात्रा से पहले स्थानीय व्यवस्था की जानकारी ले लें।
स्रोत: जागरण जोश और समाचार एजेंसी की रिपोर्टें

