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उज्जैन के खड़े हनुमान क्यों नहीं हिले, यह दैवीय संकेत

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उज्जैन: शहर में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य जोरों पर है। इसी बीच, सती गेट स्थित प्राचीन ‘खड़े हनुमान’ मंदिर को लेकर एक अद्भुत और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर का ढांचा तो ढहा दिया, लेकिन हनुमानजी की प्रतिमा को तमाम कोशिशों के बावजूद अपनी जगह से नहीं हिलाया जा सका। भक्त इसे भगवान का चमत्कार और दैवीय संकेत मान रहे हैं।

सड़क चौड़ीकरण की राह में था मंदिर, 4 दिन में 4 प्रयास विफल कंठाल चौराहे से छत्री चौक (मदनलाल शर्मा मार्ग) तक के रूट को चौड़ा करने के लिए नगर निगम ने सती गेट पर स्थित हनुमान मंदिर को शिफ्ट करने का प्लान बनाया था। 4 और 5 सितंबर को प्रशासन की टीम ने मंदिर पर हथौड़ा चलाया और बाहरी ढांचे को ध्वस्त कर दिया। लेकिन जब मूर्ति को हटाने की बारी आई, तो पूरी प्रशासनिक मशीनरी नाकाम साबित हुई। प्रशासन ने लगातार चार दिन में चार बार प्रतिमा को खिसकाने का प्रयास किया, लेकिन ‘खड़े हनुमान’ टस से मस नहीं हुए। आखिरकार प्रशासन को हाथ खड़े करने पड़े और भक्तों ने भगवान के सामने हाथ जोड़ लिए।

कैनोपी टेंट में सुरक्षित हैं हनुमानजी, पुरातत्व विभाग की हुई एंट्री मंदिर का ढांचा टूटने के बाद, फिलहाल हनुमानजी की मूर्ति अपने मूल स्थान पर ही सुरक्षित है और बचाव के लिए वहां एक कैनोपी टेंट लगा दिया गया है। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि हनुमानजी स्वयं अपना स्थान नहीं छोड़ना चाहते हैं।

इस रहस्यमयी घटनाक्रम के बाद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की भी एंट्री हो गई है और प्रतिमा का इतिहास खंगाला जा रहा है। अब तक इसे 170 साल (1857 के दौर) पुराना माना जा रहा था, लेकिन अब इसके परमार वंश और राजा भोज के शासनकाल से जुड़े होने के दावे भी किए जा रहे हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह प्रतिमा 1000 साल से भी अधिक पुरानी हो सकती है। फिलहाल मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश बैरागी और स्थानीय श्रद्धालु भगवान की सेवा में जुटे हुए हैं।