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मुरादाबाद में दो वोट बनवाना पड़ा भारी, मां-बेटे के खिलाफ मुकदमा इतनी हो सकती है सजा

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मयंक त्रिगुण, वरिष्ठ संवाददाता 

मुरादाबाद। दो वोटों की चाहत में एक महिला शमीम जहां ने अलग-अलग नामों से दो गणना-पत्र (एसआइआर फार्म) भर दिये। दोनों आवेदनों की मैपिंग के लिए आवेदन बेटे मो. रहीश की ओर से किया गया। मगर, दोनों का फर्जीवाड़ा चल ना पाया। फार्म डिजीटाइजेशन के दौरान खेल पकड़ में आ गया जिसके बाद आरोपित महिला शमीम जहां और उसके बेटे मो. रहीश के विरुद्ध कोतवाली थाने में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 31 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार शमीम नाम की महिला ने दूसरा फार्म अमीना बानो के नाम से भरा था। मामला विधानसभा-27 मुरादाबाद ग्रामीण से जुड़ा है। विधानसभा के बूथ संख्या 171 से 180 के सुपरवाइजर राजीव प्रकाश ने बताया कि भाग संख्या 378 नगर निगम कार्यालय कक्ष संख्या-3 में अमीना बानो नाम की मतदाता हैं। जिसका इपिक नंबर एलवाइडब्ल्यू 2317063 है और पता 65 क सराय गुलजारीमल दर्ज है।

इसी बूथ पर अमीना बानो का दूसरा वोट शमीम जहां के नाम से बना है जिसका इपिक नंबर डब्ल्यूजेडके 1448505 है और पता 50 सराय गुलजारीमल मुरादाबाद दर्ज है। महिला ने दोनों स्थानों से फिर से अमीना बानो और शमीम जहां नाम से गणना-पत्र भर दिये। दोनों ही फार्म के लिए समान आधार कार्ड संख्या 915354936478 का प्रयोग किया।

दोनों में एक ही फोटो का प्रयोग किया। महिला ने अमीना बानो नाम से जो गणना पत्र भरा उसमें पति आफताब की इपिक आइडी का उल्लेख किया, वहीं शमीम जहां नाम से जो गणना-पत्र भरा। उसमें माता मुन्नी की इपिक आइडी का इस्तेमाल किया। दोनों फार्मों की मैपिंग के लिए बेटे मो. रहीश ने आवेदन किया।

यह पूरा कृत्य लोक प्रतिनिधित्नव अधिनियम 1950 की धारा 31 के अंतर्गत एक ही मतदाता द्वारा दो गणना प्रपत्र भरकर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम का उल्लंघन है। सीओ कोतवाली सुनीता दहिया ने बताया कि शिकायती पत्र के आधार पर आरोपित महिला के विरुद्ध प्राथमिकी लिखी गई है। अग्र‍िम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

एक साल की कैद व जुर्माने का है प्रावधान
वरिष्ठ अधिवक्ता पीके गोस्वामी बताते हैं कि 1950 की धारा 31 के तहत, यदि कोई व्यक्ति मतदाता सूची तैयार करने या उसमें कोई प्रविष्टि (नाम शामिल/हटाने) से जुड़े किसी भी लिखित बयान या घोषणा में झूठी जानकारी देता है, जिसे वह जानता है कि वह गलत है या सच नहीं है, तो उसे एक साल तक की कैद या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। यह दंड मतदाता सूची में एक से अधिक स्थानों पर नाम होने या अन्य गलत जानकारी देने पर लागू होता है, और यह कानून का उल्लंघन है जिसके लिए सज़ा का प्रावधान है।

प्रत्येक मतदाता से अपील है कि वह एक ही गणना-पत्र भरे। किसी भी दशा में दो गणना-पत्र भरने के चक्कर में ना पड़े, नहीं तो आप कार्रवाई की जद में आएंगे। एक-एक फार्म डिजिटलाइज्ड हो रहा है। ऐसे में फर्जीवाड़ा किसी भी दशा में नहीं चलेगा। फर्जीवाड़ा पाने पर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।

  • अनुज सिंह, जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम