नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: एलन मस्क की Starlink और मुकेश अंबानी की Jio Satcom के बीच सैटेलाइट इंटरनेट की जंग फिर सुर्खियों में है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि Starlink, Jio Satellite Communications और भारती-समर्थित Eutelsat OneWeb — तीनों को लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन कोई भी कंपनी तब तक सर्विस शुरू नहीं कर सकती, जब तक गृह मंत्रालय की सुरक्षा शर्तें पूरी न हो जाएं। इस बीच मस्क ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों की वजह से Starlink की एंट्री में देरी हो रही है, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया है।
आम आदमी के लिए मतलब: सैटेलाइट इंटरनेट सबसे ज्यादा उन इलाकों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है, जहां मोबाइल टावर नहीं पहुंचते — पहाड़ी गांव, रेगिस्तान, दूरदराज के इलाके। वहां केबल बिछाए बिना सीधे सैटेलाइट से इंटरनेट मिलेगा। Starlink ने India Mobile Congress 2026 में कहा है कि उसने भारत में 20 गेटवे साइट्स तैयार कर ली हैं और भारतीय यूजर्स का डेटा भारत के अंदर ही रहेगा। हालांकि अभी कीमत और सर्विस लॉन्च की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है।
TRAI ने मई 2025 में सिफारिश दी थी कि सैटेलाइट कंपनियां अपने रेवेन्यू का 4 प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क के रूप में दें, पर इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। अमेजन का Project Kuiper भी चौथे आवेदक के रूप में कतार में है। यानी फिलहाल इंतजार कीजिए — तीनों कंपनियों को सुरक्षा मंजूरी मिलते ही मुकाबला शुरू होगा, जिससे ग्रामीण इंटरनेट की कीमतें और सर्विस दोनों पर असर पड़ेगा।
स्रोत: संचार मंत्री के 9 अक्टूबर के IMC बयान; 12 अक्टूबर को जारी टेलीकॉम रिपोर्ट्स

