हाईकोर्ट ने UP पुलिस को कहा ‘झूठों का झुंड’, SHO की सैलरी से वसूलेगा 65 हजार का मुआवजा

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जताई है। देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को अवैध हिरासत में रखने के मामले में कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए मौखिक रूप से उन्हें ‘बंच ऑफ लायर्स’ यानी ‘झूठों का झुंड’ तक कह दिया।

10 दिन तक थाने में रखा, मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया

याचिकाकर्ता महेंद्र गौड़ और तीन अन्य लोगों ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन्हें 13 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 के बीच बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा। एक व्यक्ति को 2 दिन और बाकी तीन को करीब 10 दिन तक हिरासत में रखा गया, लेकिन किसी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।

CCTV फुटेज गायब, GD में भी एंट्री नहीं

सच्चाई जानने के लिए हाईकोर्ट ने थाने के CCTV फुटेज तलब किए थे, लेकिन रिकॉर्डिंग गायब मिली। पुलिस ने दलील दी कि 12 अप्रैल 2026 को CCTV सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई थी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने पूछा कि क्या इसकी एंट्री जनरल डायरी में की गई थी। SHO डॉ. महेंद्र कुमार ने स्वीकार किया कि GD में कोई विवरण दर्ज नहीं है। देवरिया के SP ने भी कोर्ट को बताया कि उन्हें CCTV खराब होने की सूचना तक नहीं दी गई थी।

SHO की सैलरी से वसूलेगा 65 हजार मुआवजा

कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि तीन याचिकाकर्ताओं को 20-20 हजार और एक को 5 हजार रुपये यानी कुल 65 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। यह पूरी रकम दोषी SHO के वेतन से वसूली जाएगी और उनका यह आचरण सर्विस बुक में दर्ज किया जाएगा। सुनवाई के दौरान जब SP ने कोर्ट से माफी मांगी तो जस्टिस श्रीधरन ने कहा — ‘कोर्ट से माफी मत मांगिए, लोगों से माफी मांगिए।’ कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि थानों में CCTV का 24 घंटे चालू रहना अनिवार्य है।