मुरादाबाद में करोड़ों की GST चोरी का भंडाफोड़: फर्जी बिलिंग रैकेट के 2 शातिर गिरफ्तार

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बोगस फर्मों के जरिए सरकारी राजस्व को लगा रहे थे भारी चूना; दिल्ली और मेरठ तक फैले हैं गिरोह के तार

मुरादाबाद। विशेष जांच दल (SIT) ने मुरादाबाद में एक बड़े फर्जी बिलिंग और जीएसटी (GST) चोरी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह बोगस फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा था। मामले में एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

फर्जी फर्मों का जंजाल और टैक्स चोरी का खेल यह पूरा मामला सहायक आयुक्त राज्य कर (खंड-04) की शिकायत पर थाना मझौला में दर्ज किया गया था। जांच में इस बात का चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ‘M/S National Traders’ (GST No. 09EPBPR6153H1ZK) नामक बिल्टी फर्म के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक फर्जी फर्म तैयार की गई थी। इसके अलावा ‘Arhaan Traders’ (GST No. 09ABVPF8107B1ZN) को भी स्क्रैप फर्म के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। ई-वे बिल और कच्चे माल की आड़ में बिना माल सप्लाई किए केवल कागजों पर बिल काटकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लिया जा रहा था।

एसआईटी के हत्थे चढ़े दो आरोपी उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इस जटिल मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी। एसआईटी टीम ने तकनीकी और अभिसूचना (इंटेलिजेंस) के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है:

  1. मोहम्मद फैसल (38 वर्ष) – निवासी किसरौल, थाना नागफनी (मुरादाबाद)
  2. शाहनवाज (44 वर्ष) – निवासी खैरनगर, थाना देहली गेट (मेरठ)

पूछताछ में फैसल ने कबूल किया कि आर्थिक नुकसान झेलने के बाद, शाहनवाज ने ही उसे फर्जी जीएसटी बिलिंग के जरिए रातों-रात मोटी कमाई करने का लालच दिया था।

मास्टरमाइंड ईशान मलिक की तलाश, इन फर्मों से जुड़े तार पूछताछ में सामने आया है कि इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड ‘ईशान मलिक’ है, जो 2022 से ही जीएसटी बिलिंग के अवैध धंधे में सक्रिय है। यह नेटवर्क मुरादाबाद से लेकर दिल्ली और मेरठ तक फैला हुआ है। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मुरादाबाद की कई प्रमुख फर्मों को फर्जी बिलों के आधार पर माल सप्लाई दिखाते थे। जिन फर्मों के नाम सामने आए हैं, उनमें मुख्य हैं:

  • उमेमा हैंडीक्राफ्ट (Umaima Handicraft)
  • नाजिम संस (Nazim Sons)
  • जिलानी ट्रेडर्स (Jeelani Traders)
  • अल अर्श इंटरनेशनल (Al Arsh International)

अवैध भुगतान को खपाने के लिए बैंक खातों के साथ-साथ नकद लेन-देन का भी सहारा लिया जाता था।

इन धाराओं में दर्ज है मुकदमा प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मामले में 11 अप्रैल 2026 को थाना मझौला में अपराध संख्या 365/2026 दर्ज किया गया था। शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 336, 338 और 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में विवेचना के दौरान धारा 340(2) BNS की भी बढ़ोतरी की गई।

फिलहाल एसआईटी पूरे नेटवर्क की वित्तीय और डिजिटल कुंडली खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि मास्टरमाइंड ईशान मलिक की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कई और सफेदपोश चेहरों से नकाब उठ सकता है।