मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ
मुरादाबाद-राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना के बाद अब सूबे का पूरा प्रशासनिक अमला गहरी नींद से जाग गया है। राज्य सरकार के सख्त निर्देशों के बाद हर जिले में अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की सघन जांच शुरू हो गई है। इसी कड़ी में अब ‘Moradabad MDA Action‘ की गूंज तेजी से सुनाई दे रही है। शहर में जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने मानकों को ताक पर रखकर चल रही इमारतों पर अपना हंटर चलाना शुरू कर दिया है।
इस बड़े अभियान के तहत सबसे पहली गाज मुरादाबाद के दीपा हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर पर गिरी है। दरअसल, प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि इस अस्पताल के निर्माण और संचालन में नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। जैसे ही एमडीए की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची, तो जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। इसके तुरंत बाद टीम ने इस पूरे अस्पताल को सील कर दिया। बताया जा रहा है कि इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद से शहर के बाकी अवैध निर्माणकर्ताओं और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले संस्थान संचालकों की धड़कनें काफी तेज हो गई हैं।
Moradabad MDA Action: मानकों की अनदेखी पड़ी भारी
असल में, लखनऊ की घटना ने यह साफ कर दिया है कि सुरक्षा मानकों से जरा सा भी समझौता बड़े और जानलेवा हादसे का कारण बन सकता है। मुरादाबाद में जब प्राधिकरण की टीम दीपा हॉस्पिटल पहुंची, तो उन्होंने सबसे पहले बिल्डिंग के स्वीकृत नक्शे और दूसरे जरूरी दस्तावेजों की मांग की। जांच में यह बात शीशे की तरह साफ हो गई कि अस्पताल प्रबंधन के पास न तो जरूरी अनुमतियां थीं और न ही भवन निर्माण के नियमों का पालन किया गया था। मानकों के इस स्पष्ट उल्लंघन को देखते हुए अधिकारियों ने बिना कोई वक्त गंवाए सीलिंग की कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल के कारण पूरी कार्रवाई बेहद शांतिपूर्ण तरीके से निपट गई।
कोचिंग सेंटरों और कमर्शियल इमारतों पर भी लटकी तलवार
दीपा अस्पताल पर जड़े गए ताले के बाद से शहर के उन तमाम लोगों में हड़कंप का माहौल है जो नियमों को दरकिनार कर अपना कारोबार चला रहे हैं। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक शुरुआत भर है। आने वाले दिनों में ऐसे तमाम कोचिंग सेंटर, बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और स्कूल रडार पर होंगे, जो पार्किंग व्यवस्था, फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) जैसे जरूरी मानकों के बिना संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मुरादाबाद के कई तंग और घने इलाकों में ऐसे अस्पताल और कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जहां किसी अनहोनी के वक्त दमकल की गाड़ी का पहुंचना भी लगभग नामुमकिन है। एमडीए की इस सख्त कार्रवाई के शुरू होते ही कई संस्थानों ने रातों-रात अपने फायर सेफ्टी उपकरण मंगाने और अधूरे कागजात दुरुस्त करने की दौड़-भाग शुरू कर दी है।
जनता से भी प्रशासन की खास अपील
मुरादाबाद जिला प्रशासन इस बात को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद है कि किसी भी आपात स्थिति में आम नागरिकों की जान खतरे में न पड़े। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनहित और लोगों की सुरक्षा उनके लिए सबसे ऊपर है और यह अभियान आगे भी बिना किसी ढिलाई के जारी रहेगा। इसके साथ ही, प्रशासन ने शहर के आम लोगों से भी अपील की है कि अगर उन्हें अपने आसपास किसी भी अस्पताल, स्कूल या कोचिंग सेंटर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी नजर आती है, तो वे बेझिझक संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें। यह तय है कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को अब बख्शा नहीं जाएगा।