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सपा के मुख्य सचेतक कमाल अख्तर का इस्तीफा, जानिए अखिलेश के एक्शन की इनसाइड स्टोरी

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मयंक त्रिगुण, ब्यूरो चीफ

उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद से ही समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर जिस तरह की हलचल मची है, उसने यूपी पॉलिटिक्स का पारा और भी ज्यादा चढ़ा दिया है। इसी कड़ी में अब एक बड़ी खबर लखनऊ से सामने आ रही है। विधानसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) और कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमाल अख्तर ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस अप्रत्याशित कदम ने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।

असल में, कमाल अख्तर ने खुद मीडिया के सामने आकर इस इस्तीफे की पुष्टि की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह कदम उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सीधे निर्देश पर उठाया है। हालांकि, राजनीति में कोई भी फैसला बिना किसी ठोस वजह के नहीं होता। बताया जा रहा है कि इस अचानक हुए बदलाव के तार पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और मुरादाबाद की नवनिर्वाचित सांसद रुचि वीरा के साथ उनके तीखे मनमुटाव से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

यूपी पॉलिटिक्स: क्या कमाल अख्तर पर भारी पड़ गईं सांसद रुचि वीरा?

दरअसल, कमाल अख्तर और मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा के बीच सियासी अदावत की खबरें लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान ही सुलगने लगी थीं। लेकिन तब चुनाव के माहौल में पार्टी ने किसी तरह डैमेज कंट्रोल कर लिया था। यह विवाद हाल ही में तब खुलकर सड़क पर आ गया, जब बीते 14 जून को मुरादाबाद में सपा का एक बड़ा ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सम्मान सम्मेलन आयोजित हुआ। हैरानी की बात यह रही कि इस अहम कार्यक्रम में न तो क्षेत्र की सांसद रुचि वीरा को न्योता दिया गया और न ही कार्यक्रम की किसी भी प्रचार सामग्री या पोस्टर में उनकी तस्वीर लगाई गई।

स्थानीय लोगों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, पोस्टर से अपनी तस्वीर गायब होने और अपने ही संसदीय क्षेत्र में अनदेखी किए जाने से रुचि वीरा बेहद नाराज हो उठीं। उन्होंने इस गुटबाजी की शिकायत सीधे सपा आलाकमान से कर दी। बात इतनी बढ़ गई कि डैमेज कंट्रोल के लिए खुद अखिलेश यादव को मैदान में उतरना पड़ा।

लखनऊ में तलब हुए नेता, अखिलेश ने बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

पार्टी के भीतर बढ़ते इस असंतोष को शांत करने के लिए सपा प्रमुख ने लखनऊ में तत्काल एक हाई-लेवल इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इस महत्वपूर्ण बैठक में सांसद रुचि वीरा, कांठ के विधायक कमाल अख्तर, राज्यसभा सांसद जावेद अली और पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी को आमने-सामने बिठाया गया। सियासी जानकारों की मानें तो इसी बंद कमरे की बैठक में यह तय हो गया था कि मुरादाबाद की गुटबाजी का खामियाजा किसी न किसी को तो भुगतना पड़ेगा। अब कमाल अख्तर का मुख्य सचेतक के पद से इस्तीफा उसी तल्ख मीटिंग का सीधा नतीजा माना जा रहा है।

मनोज पांडे के बाद कमाल अख्तर का जाना, सचेतक पद पर रस्साकशी

आपको याद होगा कि कमाल अख्तर से पहले विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक की कुर्सी मनोज पांडे के पास थी। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उन्होंने यह पद छोड़ा था और बाद में वह भाजपा सरकार में मंत्री बन गए। अब मनोज पांडे के बाद कमाल अख्तर ने भी यह अहम पद छोड़ दिया है। हालांकि, कमाल अख्तर ने बगावत के बजाय अनुशासन का रास्ता चुना है।

अपने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कमाल अख्तर ने बहुत ही सधे हुए अंदाज में इसे एक ‘संगठनात्मक बदलाव’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बदलाव प्रकृति का शाश्वत नियम है। विधायक ने जोर देकर कहा कि अखिलेश यादव का हर आदेश उनके लिए सर्वोपरि है और वे पार्टी नेतृत्व के हर फैसले का पूरे दिल से सम्मान करते हैं। बहरहाल, इस इस्तीफे ने यह तो साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी अब अनुशासनहीनता और गुटबाजी के मुद्दे पर बेहद सख्त मूड में है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में मुख्य सचेतक की यह अहम कुर्सी अखिलेश यादव किस नए चेहरे को सौंपते हैं।