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5 दिन बाद खत्म हुआ पहाड़ का सबसे बड़ा खोज अभियान, 10 श्रमिकों के निकाले गए शव

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चमोली (पीपलकोटी)। उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित हाट-सियासैण, मायापुर (पीपलकोटी) में निर्माणाधीन सुरंग के भीतर विगत 13 अगस्त को हुए भीषण जलभराव और भूस्खलन के बाद चलाया जा रहा महा-बचाव अभियान अंततः 117 घंटे बाद सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण खोज एवं बचाव अभियान में राहत दलों ने सुरंग में फंसे सभी 22 श्रमिकों को बाहर निकाल लिया है। इस दुखद हादसे में 10 श्रमिकों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि 12 श्रमिकों को सकुशल बचा लिया गया है।

117 घंटे चला मौत से संघर्ष प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय सुरंग में निर्माण कंपनी के लगभग 22 कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अचानक पानी का भारी रिसाव होने और भूस्खलन के कारण सभी श्रमिक भीतर ही फंस गए। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सेना और जिला आपदा मोचन बल के जवानों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर बचाव कार्य आरंभ किया। 117 घंटे से अधिक समय तक चले इस अभियान के पहले दिन 19 श्रमिकों को बाहर निकाला गया, जिनमें 12 घायल और 7 मृत अवस्था में थे। इसके पश्चात 15 अगस्त को एक और अंतिम दिन 18 अगस्त को दो अन्य श्रमिकों के शव बरामद किए गए।

शक्तिशाली जल निकासी यंत्रों से निकाला गया पानी यह बचाव अभियान अत्यंत दुर्गम और कठिन परिस्थितियों में चलाया गया। सुरंग के भीतर भारी मात्रा में भरे पानी को निकालने के लिए शक्तिशाली जल निकासी (चूषक) यंत्रों का उपयोग किया गया। मलबा हटाने और भीतर फंसे भारी यंत्रों (उपकरणों) को बाहर निकालने के साथ-साथ संभावित स्थानों पर निरंतर सघन खोज की गई। पानी की निकासी होने से ही राहत दलों का सुरंग के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचना संभव हो सका।

जिलाधिकारी ने की निरंतर निगरानी इस पूरे खोज एवं बचाव अभियान की निगरानी जिलाधिकारी गौरव कुमार द्वारा की गई। उन्होंने घटनास्थल पर उपस्थित रहकर सभी कार्यदायी संस्थाओं और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया। जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता फंसे हुए श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना थी। सुरक्षित निकाले गए सभी घायल श्रमिकों को तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और प्रशासन द्वारा उनके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी की जा रही है।

सभी सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों के आपसी समन्वय व तत्परता से ही इस कठिन और चुनौतीपूर्ण अभियान को पूरा किया जा सका।