देहरादून। उत्तराखंड को उसका पहला सफेद बाघ मिल गया है। ग्वालियर चिड़ियाघर से ढाई साल का नीली आंखों वाला सफेद बाघ ‘तेजस’ 556 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके देहरादून चिड़ियाघर पहुंच गया है। 13 सदस्यीय टीम के साथ सड़क मार्ग से 12 से 14 घंटे की यात्रा के बाद तेजस बुधवार को दून जू पहुंचा, जहां फिलहाल उसे करीब 20 दिनों के क्वारंटीन में रखा गया है।
यह आदान-प्रदान कार्यक्रम (एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम) के तहत हुआ है। इसके बदले में देहरादून चिड़ियाघर का करीब पांच साल का रॉयल बंगाल टाइगर ‘भोला’ ग्वालियर भेजा गया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तेजस का स्वास्थ्य, व्यवहार और खानपान पर कड़ी नजर रखी जा रही है। क्वारंटीन पूरा होने के बाद, यानी करीब एक महीने में, पर्यटक उसे बाड़े में देख सकेंगे।
तेजस की सबसे बड़ी खासियत उसकी नीली आंखें और सफेद फर पर काली धारियां हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद बाघ कोई अलग प्रजाति नहीं है, बल्कि यह रंग का एक दुर्लभ वंशानुगत रूप है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने मध्य प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा के नंदनकानन से भी सफेद बाघ लाने की मंजूरी दी है, ऐसे में आने वाले समय में दून जू में एक और सफेद बाघ के आने की उम्मीद है।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। माना जा रहा है कि तेजस के आने से देहरादून चिड़ियाघर में पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।