हरिद्वार, 28 अक्टूबर: हरिद्वार की सड़कों को गड्ढा-मुक्त बनाने का अभियान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शहर में गड्ढों वाली सड़कों की मरम्मत और यातायात प्रबंधन सुधारने का काम चल रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 26 अक्टूबर को इस अभियान की जानकारी साझा की, जिसमें काम करते हुए मजदूरों और मशीनों का वीडियो भी दिखाया गया। हरिद्वार जैसे तीर्थ नगर में सड़कों की हालत सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शहर की अर्थव्यवस्था से जुड़ी है।
हरिद्वार हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। कांवड़ यात्रा, कुंभ जैसे आयोजनों और रोजाना के स्नान के लिए यहां देश भर से लोग आते हैं। खराब सड़कें न केवल हादसों का कारण बनती हैं, बल्कि जाम और देरी से तीर्थयात्रियों को परेशानी भी होती है। स्थानीय दुकानदारों और होटल कारोबारियों के लिए भी अच्छी सड़कें जरूरी हैं, क्योंकि पर्यटक का अनुभव ही तय करता है कि वह दोबारा शहर आएगा या नहीं। यही वजह है कि सरकार ने इस अभियान को दृश्य प्राथमिकता दी है।
अभियान के तहत गड्ढों की पहचान, उनकी भराई और सड़क की ऊपरी सतह को दुरुस्त करने का काम हो रहा है। साथ ही यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जा रहा है, ताकि व्यस्त मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे। धार्मिक शहरों में यातायात की चुनौती अलग तरह की होती है — पैदल श्रद्धालु, दोपहिया वाहन, बसें और मालवाहक एक ही सड़क साझा करते हैं। ऐसे में केवल गड्ढे भरना काफी नहीं, बल्कि पैदल मार्गों, संकेतकों और पार्किंग व्यवस्था को भी साथ में सुधारना होगा।
उत्तराखंड सरकारें पहले भी तीर्थ केंद्रों में सड़क मरम्मत अभियान चला चुकी हैं, लेकिन धामी सरकार ने धार्मिक शहरों के शहरी ढांचे को अपनी दृश्य प्रतिबद्धता का स्तंभ बनाया है। कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार की तैयारी को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। मेले से पहले सड़कों, घाटों और बुनियादी सुविधाओं का काम पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है, क्योंकि समय कम है और काम का दायरा बड़ा है। अभियान की गति ही तय करेगी कि वादा जमीन पर कितना उतरता है।
आम लोगों के लिए इस अभियान का मतलब रोजमर्रा की राहत है — स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित सड़कें। लेकिन नागरिकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि मरम्मत कितने दिन टिकती है। बरसात के बाद फिर से गड्ढे उभर आना देश भर के शहरों की आम शिकायत है। इसलिए गुणवत्ता की निगरानी और मरम्मत के बाद की देखभाल ही इस अभियान की सफलता की असली कसौटी होगी।
स्रोत: मुख्यमंत्री कार्यालय के 26 अक्टूबर के संदेश पर आधारित समाचार रिपोर्टें

