हल्द्वानी/देहरादून। मणिपुर में मां भारती की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड के वीर सपूतों को आज नम आंखों और भारी मन से अंतिम विदाई दी गई। गुरुवार सुबह जब सेना के विशेष हेलिकॉप्टर से तिरंगे में लिपटे इन शहीदों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास पहुंचे, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं। पूरे इलाके में ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद अमर रहें’ के नारे गूंजने लगे।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देख बेसुध हुए परिजन देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले इन वीरों के घर में मातम पसरा हुआ है। जैसे ही सेना के जवान तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को लेकर आंगन में पहुंचे, परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अपने पति को तिरंगे में लिपटा देख शहीद की पत्नी और बच्चे बेसुध हो गए। वहां मौजूद रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें ढांढस बंधाया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद सेना के अधिकारियों और प्रशासनिक अमले की आंखें भी नम हो गईं।
चित्रशिला घाट पर बलवंत सिंह का अंतिम संस्कार मणिपुर में शहीद हुए वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल का अंतिम संस्कार हल्द्वानी के रानीबाग स्थित पवित्र चित्रशिला घाट पर किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए बेताब था।
सेना ने दिया अंतिम सम्मान चित्रशिला घाट पर सेना की टुकड़ी ने शहीद वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल को गार्ड ऑफ ऑनर (गार्ड सलामी) देकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी। सेना के जवानों ने अपने साथी के पार्थिव शरीर को कंधा दिया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शहीद का अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिवार के सदस्य ने कांपते हाथों से उन्हें मुखाग्नि दी।
इस दौरान स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ कई राजनीतिक हस्तियों ने भी घाट पर पहुंचकर शहीदों के चरणों में पुष्प चक्र अर्पित किए और उनकी शहादत को नमन किया।
(उत्तराखंड सरकार ने शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि इस दुख की घड़ी में पूरा प्रदेश और देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।)