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उत्तराखंड में कुदरत का कहर- टिहरी-चमोली में भारी लैंडस्लाइड, बागेश्वर में स्कूलों की छुट्टी

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देहरादून/चमोली। उत्तराखंड में मानसूनी बारिश और पहाड़ों से गिरता मलबा एक बार फिर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। राज्य में पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश ने पहाड़ों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। टिहरी और चमोली समेत प्रदेश के 10 जिलों में हालात बिगड़ गए हैं, जहां भूस्खलन के कारण 100 से ज्यादा सड़कें बंद हो गई हैं और लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं।

चमोली में दरकी ‘काली चट्टान’, जान जोखिम में डाल रहे लोग

चमोली जिले में आज सुबह से हालात काफी खराब हैं। यहां निजमुला मोटर मार्ग पर स्थित ‘काली चट्टान’ से लगातार भारी भूस्खलन हो रहा है। सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा गिरने के कारण यह मार्ग पूरी तरह से खतरनाक हो गया है और यातायात ठप हो गया है। इसके बावजूद कुछ लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक रास्ते से आवाजाही करने का प्रयास कर रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।

आपदा के हालातों पर एक नज़र (Quick Facts):

विवरणजानकारी
प्रभावित राज्यउत्तराखंड (टिहरी, चमोली, बागेश्वर आदि)
सड़कें बंद10 जिलों की कुल 103 सड़कें (स्टेट और लिंक मार्ग)
चमोली का हालनिजमुला मोटर मार्ग (‘काली चट्टान’) पर भारी भूस्खलन
स्कूलों की छुट्टीमौसम को देखते हुए बागेश्वर जिले में कल भी बंद रहेंगे स्कूल
मौसम की स्थितिपिछले 3 दिनों से लगातार भारी बारिश जारी

103 सड़कें बंद, बागेश्वर में स्कूलों की छुट्टी

प्रदेशभर में लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रशासन की टीमें बंद मार्गों को खोलने और मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश से काम में भारी बाधा आ रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य के 10 जिलों में कुल 103 छोटी-बड़ी सड़कें बंद हैं, जिससे कई गांवों का मुख्यालयों से संपर्क कट गया है।

उधर, मौसम विभाग की चेतावनी और हालात की गंभीरता को देखते हुए बागेश्वर जिला प्रशासन ने एहतियातन कल भी जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा कर दी है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन (SDRF) की टीमें अलर्ट मोड पर हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों से सख्त अपील की है कि वे खराब मौसम में पहाड़ों की यात्रा करने से बचें, बहुत जरूरी होने पर ही सफर करें और भूस्खलन वाले क्षेत्रों से उचित दूरी बनाए रखें।