हाइलाइट्स (Highlights):
- ठाकुरद्वारा क्षेत्र के बलिया गांव में 8 दिनों से जारी तेंदुए की दहशत के बीच सोमवार सुबह मिली बड़ी राहत।
- वन विभाग की लगातार कवायद के बाद, सुबह करीब 5 बजे लगाए गए पिंजरे में कैद हुआ तेंदुए का बच्चा (शावक)।
- लालापुर पीपलसाना गांव में संतोष देवी नामक महिला को शिकार बनाने के बाद से इलाके में था भारी खौफ का माहौल।
- खेतों में जाने वाले किसानों और चारा लाने वाली महिलाओं ने ली राहत की सांस, वन विभाग की टीम ने पिंजरे को लिया कब्जे में।
- शावक के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों को जगी उम्मीद, जल्द ही मुख्य तेंदुआ भी होगा वन विभाग की गिरफ्त में।
विस्तृत खबर (Full Story):
ठाकुरद्वारा (बलिया)।
उत्तर प्रदेश के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से तेंदुए की दहशत झेल रहे बलिया और आसपास के ग्रामीणों के लिए सोमवार की सुबह एक बड़ी राहत भरी खबर लेकर आई। वन विभाग की लगातार कॉम्बिंग और कवायद के बाद सोमवार तड़के करीब पांच बजे एक तेंदुए का बच्चा (शावक) विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया। शावक के पिंजरे में फंसने की सूचना मिलते ही खौफ के साये में जी रहे ग्रामीणों ने गहरी राहत की सांस ली है। सूचना पाकर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पिंजरे को अपने कब्जे में ले लिया है।
महिला को शिकार बनाने के बाद से था भारी खौफ
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ठाकुरद्वारा क्षेत्र के ही लालापुर पीपलसाना गांव में एक आदमखोर तेंदुए ने खेतों में काम कर रही महिला संतोष देवी को अपना निवाला बना लिया था। इस खौफनाक घटना के बाद से तेंदुए की लगातार सक्रियता ने ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया था।
घटनाक्रम पर एक नज़र (Quick Facts):
| विवरण | जानकारी |
| प्रभावित क्षेत्र | बलिया, लालापुर पीपलसाना (ठाकुरद्वारा) |
| पकड़ा गया वन्यजीव | तेंदुए का बच्चा (शावक) |
| पकड़े जाने का समय | सोमवार सुबह करीब 5 बजे |
| पूर्व की घटना | लालापुर पीपलसाना में महिला (संतोष देवी) की मौत |
| प्रशासनिक कार्रवाई | वन विभाग द्वारा पिंजरे लगाना और रात्रि गश्त |
खेतों में जाना और बच्चों का निकलना हो गया था बंद
तेंदुए के खौफ का आलम यह था कि खेतों में काम करने जाने वाले किसानों और पशुओं के लिए चारा लेने जाने वाली महिलाओं में भारी भय का माहौल व्याप्त था। बलिया और आसपास के गांवों में तेंदुए की लगातार आहट और दिखाई देने की सूचनाएं मिल रही थीं। ग्रामीणों ने अकेले घरों से बाहर निकलना पूरी तरह से बंद कर दिया था, यहां तक कि परिजन डर के मारे बच्चों को भी घर से बाहर नहीं भेज रहे थे।
जल्द मुख्य तेंदुए के पकड़े जाने की उम्मीद
ग्रामीणों की शिकायत और बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने प्रभावित गांवों में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी। जगह-जगह पिंजरे लगाए गए थे और टीमें रात में गश्त कर तेंदुए की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही थीं। इसी कड़ी मेहनत के चलते सोमवार सुबह पिंजरे में तेंदुए का बच्चा कैद हो गया। वन विभाग के अधिकारियों ने शावक की स्थिति की बारीकी से जांच की है। तेंदुए के बच्चे के पकड़े जाने से अब ग्रामीणों को यह उम्मीद बंध गई है कि क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन चुका मुख्य तेंदुआ भी जल्द ही पिंजरे में कैद होगा।