मुरादाबाद। उत्तराखंड की सीमा से सटे मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा और कांठ क्षेत्र में गन्ने के घने खेतों को ढाल बनाकर आबादी पर निरंतर हमला कर रहे तेंदुओं के आतंक से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री के ‘आपदा में न्यूनतम जनहानि’ के संकल्प को साकार करते हुए, जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर आधारित एक ‘आधुनिक सुरक्षा प्रतिरूप’ तैयार किया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (लखनऊ) को 39.45 लाख रुपये की एक विशेष प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) भेजी गई है। इसके अंतर्गत 5 गांवों के 200 हेक्टेयर अति-संवेदनशील क्षेत्र को 24 घंटे वास्तविक समय की निगरानी और पूर्व चेतावनी तंत्र से लैस किया जाएगा।
20 कृत्रिम बुद्धिमत्ता यंत्र और सौर ऊर्जा से 24 घंटे पहरा गन्ने के ऊंचे खेतों में छिपने वाले तेंदुओं को खोजने के लिए प्रशासन ने पारंपरिक गश्त के बजाय एक उच्च-तकनीकी तंत्र का खाका खींचा है। खेतों के बीच 5 बड़े और 15 मध्यम स्तंभों (खंभों) पर 20 अत्याधुनिक निगरानी यंत्र (रात्रि दृष्टि व स्वचालित पहचान क्षमता युक्त) लगाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की समस्या को देखते हुए यह पूरा तंत्र सौर ऊर्जा पर आधारित होगा। इसमें 20 सौर ऊर्जा संचयन प्रणालियां (बैटरी) और 20 सौर पट्टिकाएं (पैनल) स्थापित की जाएंगी। मौसम की मार से इस सुरक्षा ग्रिड को बचाने के लिए तड़ित चालक इकाइयां और उच्च-गति संचार प्रणाली भी लगाई जाएगी।
नियंत्रण कक्ष से तत्क्षण चेतावनी और आसमान से खोज अभियान इस पूरी प्रणाली का हृदय एक एकीकृत नियंत्रण कक्ष होगा। जैसे ही कोई तेंदुआ या संदिग्ध हिंसक वन्यजीव निगरानी यंत्र के दृश्य क्षेत्र में आएगा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता इकाई तुरंत उस चित्र का विश्लेषण कर स्थान और समय के साथ नियंत्रण कक्ष को सीधा अलर्ट (सतर्कता संदेश) भेजेगी। नियंत्रण कक्ष से तुरंत जन उद्घोषणा प्रणाली और 4 हस्तचलित ध्वनि विस्तारक यंत्रों (मेगाफोन) के माध्यम से ग्रामीणों को चेतावनी दी जाएगी। किसी भी मानव दल को खतरे में डालने से पहले 2.50 लाख रुपये की लागत वाला एक विशेष मानवरहित विमान (ड्रोन) आसमान से तेंदुए की सटीक स्थिति का पता लगाएगा। तत्पश्चात वन विभाग का बचाव दल 10 आधुनिक पिंजरों और 100 उच्च क्षमता वाले प्रकाश यंत्रों की मदद से मानक संचालन प्रक्रिया के तहत वन्यजीव को सुरक्षित पकड़ेगा।
39.45 लाख रुपये की लागत का विस्तृत गणित अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा तैयार किए गए विस्तृत लागत अनुमान के अनुसार, इस परियोजना में 10 वन्यजीव बचाव पिंजरों पर सर्वाधिक 10 लाख रुपये और 20 कृत्रिम बुद्धिमत्ता निगरानी यंत्रों पर 7 लाख रुपये व्यय होंगे। इसके अतिरिक्त प्रसंस्करण इकाइयों पर 6 लाख, सौर पट्टिकाओं पर 2.50 लाख, मानवरहित विमान पर 2.50 लाख, और संचार इकाइयों पर 2 लाख रुपये का व्यय प्रस्तावित है। कुल 39.45 लाख रुपये की यह परियोजना 10 सप्ताह के भीतर 6 चरणों (सर्वेक्षण, स्तंभ व सौर स्थापना, प्रणाली एकीकरण, परीक्षण, प्रशिक्षण और वास्तविक तैनाती) में धरातल पर उतरेगी।
सफल होते ही 50 किलोमीटर के दायरे में होगा महा-विस्तार प्रशासन के अनुसार, यह 5 गांवों की प्रायोगिक परियोजना महज एक आधारशिला है। इसके परिणामों और सतर्कता की सटीकता का विश्लेषण करने के पश्चात इसे कांठ और ठाकुरद्वारा तहसील के लगभग 50 किलोमीटर के विशाल दायरे में विस्तारित किया जाएगा। शासन स्तर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने हेतु 33 करोड़ 92 लाख 95 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की गई है। मुरादाबाद की यह आधुनिक परियोजना पूरे प्रदेश के लिए एक उत्कृष्ट नजीर बनेगी।