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पहली करवा चौथ: नई दुल्हनों के लिए व्रत के खास नियम और मान्यताएं

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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर: करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को है, और जिन महिलाओं की शादी के बाद यह पहली करवा चौथ है, उनके लिए इस व्रत के कुछ खास नियम और मान्यताएं जुड़ी हैं। परंपरा के अनुसार पहली करवा चौथ सुहागिन के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है, इसलिए इसकी तैयारी भी विशेष होती है।

मान्यता है कि पहली करवा चौथ पर सास की सरगी खाना सबसे शुभ होता है। सरगी में सास अपनी बहू को सुहाग की वस्तुएं — सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, बिंदी, मिठाई और फल देती हैं, और बहू सूर्योदय से पहले इन्हें ग्रहण करती है। अगर सास साथ न हों तो मां या बड़ी ननद से सरगी लेने की परंपरा है।

पहली बार व्रत रखने वाली दुल्हन के लिए सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है — मेहंदी, महावर, चूड़ा, पायल, बिछिया, नथ, मांग टीका सहित पूरा श्रृंगार। मान्यता है कि पहली करवा चौथ पर दुल्हन को लाल या मैरून रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। शाम को चंद्रमा निकलने पर छलनी से चांद और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोला जाता है; पहली बार में पति के हाथ से पानी पीने की परंपरा विशेष महत्व रखती है।

पंडितों के अनुसार, पहली करवा चौथ का व्रत पूरे विधि-विधान से करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है।

स्रोत: लोक परंपरा और धार्मिक मान्यता